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यूनेस्को विश्व धरोहर बनेगा अहमदाबाद!

यूनेस्को विश्व धरोहर बनेगा अहमदाबाद!

अगर सब कुछ ठीक रहा तो गुजरात का अहमदाबाद शहर यूनेस्को विश्व धरोहर बन जाएगा। शहर की अनोखी बसाहट, समुदायों के बीच सह अस्तित्व के बंधन के साथ आर्थिक एवं सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता के कारण यह प्रस्ताव किया गया है।

यूनेस्को के एक अधिकारी ने कहा कि यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने 31 मार्च 2011 को अहमदाबाद को संस्कृति खंड में विश्व धरोहर का दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव किया है।

प्रस्ताव में अहमदाबाद के अभूतपूर्व सार्वभौम मूल्यों का उल्लेख करते हुए पिछली कई सदियों से इस शहर की अनोखी बसाहट, आर्थिक, वाणिज्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के साथ विभिन्न समुदाय के लोगों के बीच सहअस्तित्व की भावना का उल्लेख किया गया है।

घरों के निर्माण में लकड़ी का शानदार उपयोग स्थापत्य का अदभुत नमूना पेश करता है, साथ ही कपड़े पर छपाई और हाथ का काम इस शहर को अनोखी धरोहर के रूप में पेश करता है। इसकी आर्थिक आत्मनिर्भरता न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश में इसे उच्च स्थान प्रदान करती है। शहर की बसाहट मानवीय मूल्यों के साथ जीवन के सर्वस्वीकार्य नियमों का जीवंत प्रतीक हैं।

यूनेस्को के समक्ष पेश प्रस्ताव में कहा गया है कि अहमदाबाद शहर का भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण योगदान है जिससे महात्मा गांधी और गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर का नाम जुड़ा हुआ है।

प्रस्ताव के अनुसार, अहमदाबाद लम्बे समय से न केवल पुरातन परंपरा का ध्वजवाहक रहा बल्कि समुद्र के रास्ते कारोबार के साथ विभिन्न संस्कृतियों के बीच सम्पर्क का गवाह रहा। यह शहर कला, संस्कृति, शिक्षा, साहित्य, उद्योग, वाणिज्य का अदभुत संगम है।

गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने अहमदाबाद शहर में आपने प्रवास के दौरान कुछ अदभुत रचनाएं की। इस श्रेणी में दुनिया के ऐसे ही कुछ शहरों से तुलना करते हुए कहा गया है कि अहमदाबाद में विश्व धरोहर बनने की सभी विशेषताएं मौजूद हैं।

इस संदर्भ में अहमदाबाद की तुलना मलेशिया के मलेका-जार्जटाउन, फ्रांस के लियोन शहर से की गई है। इनकी तुलना करते हुए कहा गया है कि मलेका-जार्जटाउन और लियोन शहर अपनी अदभुत बसाहट के साथ आर्थिक और सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता के लिए मशहूर हैं। अहमदाबाद की तरह ही दोनों शहर सांस्कृतिक विविधता के लिए जाने जाते हैं जहां लोग सह अस्तित्व की भावना से रहते हैं। स्थापत्य की दृष्टि से भी अहमदाबाद और इन दोनों शहरों में काफी समानता है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि अहमदाबाद को अद्वितीय आबादी वाले क्षेत्र का शानदान उदाहरण होने के कारण विश्व धरोहर घोषित किया जाना चाहिए।

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