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ध्रुव हेलीकॉप्टरों में स्थापित होंगी मिसाइलें

ध्रुव हेलीकॉप्टरों में स्थापित होंगी मिसाइलें

प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत द्वारा स्वदेश निर्मित ध्रुव हेलीकॉप्टरों में दो वर्ष के भीतर मिसाइलें स्थापित करने की संभावना है। ये शस्त्र प्रणाली महत्वाकांक्षी मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत स्थापित होगी।

हवा से सतह में वार करने में सक्षम नाग टैंक-रोधी मिसाइल के उन्नत संस्करण हेलीना को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन विकसित कर रहा है। इसका विकास अंतिम चरण में है। यह 2013 में उपयोगकर्ता के परीक्षण के लिए तैयार हो जाएगी।

डीआरडीओ प्रमुख वीके सारस्वत ने एक साक्षात्कार में बताया कि पहली बार हम ऐसी स्वदेश निर्मित मिसाइल हेलेना विकसित कर रहे हैं, जिसे एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टर के सशस्त्र संस्करण पर स्थापित किया जाएगा। मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत नाग मिसाइल प्रणाली को उन्नत किया गया है, जिससे दुश्मन के टैंकों पर सात से आठ किलोमीटर की दूरी से भी निशाना साधा जा सकेगा।

सारस्वत ने कहा कि सतह आधारित प्रणाली से मिसाइल के शुरुआती परीक्षण सफल रहे और हेलीकॉप्टर के साथ उसके एकीकरण का काम अब शुरू होगा। नाग ऐसी पांच मिसाइल प्रणालियों में से एक है, जिसे समेकित मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत डीआरडीओ ने विकसित किया है।

डीआरडीओ कुछ नई मिसाइलों या मौजूदा मिसाइलों की मारक क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। इस कार्यक्रम के तहत कम दूरी की क्षमता वाली सतह से हवा में वार करने वाली मिसाइल इंटरसेप्शन प्रणाली भी फ्रांस के तहत विकसित की जानी है जिस पर काम इस वर्ष के अंत से शुरू होगा।

सारस्वत ने कहा कि सामरिक मिसाइल प्रणाली में हमारा मुख्य मकसद लघु क्षमता वाली सतह से हवा में वार करने वाली प्रणाली है। हम इस कार्यक्रम पर फ्रांस के एमबीडीए के साथ काम करने की कोशिश कर रहे हैं। आठ से नौ किलोमीटर की मारक क्षमता वाली मिसाइलें रूस निर्मित पेचोरा और ओएसए-एके मिसाइल प्रणालियों का स्थान लेंगी, जिसका वायुसेना और थलसेना इस्तेमाल कर रही हैं।

सारस्वत ने कहा कि हमने इस क्षेत्र में (लघु क्षमता वाली मिसाइल प्रणालियों में) ज्यादा काम नहीं किया है। हमारी (एमबीडीए के साथ) बातचीत चल रही है। उम्मीद है कि इस वर्ष के अंत तक काम शुरू हो जाएगा। भारत सतह से हवा में वार करने वाली आकाश मिसाइल जैसी मध्यम और लंबी मारक क्षमता वाली मिसाइल प्रणालियां विकसित कर चुका है, लेकिन अब तक उसने इसी तरह की लघु क्षमता वाली प्रणालियां विकसित नहीं की थीं।

सारस्वत ने इस बारे में कहा, डिजाइन और विकास पूरी तरह स्वदेशी होगा और सिर्फ प्रौद्योगिकी निर्माण जैसी कुछ चीजें भागीदार (एमबीडीए) के जरिए मिलेंगी।

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  • Web Title:ध्रुव हेलीकॉप्टरों में लगेंगी मिसाइलें