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प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी हो: फिक्की

प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी हो: फिक्की

देश में ज्यादा निवेश आकर्षित करने के लिए लौह अयस्क, लिग्नाइट और बॉक्साइट जैसे प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन मौजूदा पहले आओ-पहले पाओ की नीति के बदले नीलामी के जरिए करने किया जाना चाहिए। यह अनुशंसा एक प्रमुख उद्योग संगठन की है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री (फिक्की) ने अशोक चावला समिति को सौंपी अपनी अनुशंसाओं में कहा, ‘‘खनिज ब्लॉकों का आवंटन राष्ट्रीय अन्वेषण लाइसेंसिंग नीति की तरह नीलामी प्रक्रिया के जरिए किया जाए।’’

केंद्र सरकार ने पानी, जमीन, गैस, कोयला, स्पेक्ट्रम और खानों सहित प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन के लिए विस्तृत सिद्धांत तय करने के लिए इस साल फरवरी में केंद्रीय वित्त सचिव चावला की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की थी।

फिक्की ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय अन्वेषण लाइसेंसिंग नीति की महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं अपनाने से प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में संभावित सर्वाधिक निवेश आकर्षित किया जा सकता है। संसाधनों पर कई पक्ष दावा करते हैं, इनकी नीलामी प्रक्रिया पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के जरिए होनी चाहिए।’’

अज्ञात खनिजों के अन्वेषण के सम्बंध में फिक्की ने कहा कि अज्ञात संसाधनों के अन्वेषण में हिस्सा लेने वालों को खानों के आवंटन में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उद्योग संगठन के मुताबिक ऐसी स्थिति में जब खनिजों की मात्र और स्थिति के सम्बंध में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं हो तब नीलामी आधारित तंत्र उचित नहीं है।

ऐसे मामलों में अटकलों के आधार पर बोली लगाने से ज्यादा कीमत चुकाने पर निवेशकों को भारी जोखिम उठाना पड़ सकता है।  अन्य अनुशंसाओं में आवंटित प्राकृतिक संसाधन क्षेत्रों के संवर्धन को महत्व देने, खनिज संसाधनों के विकास के लिए समयबद्ध तंत्र की स्थापना, खनन उद्योग के लिए एकल शुल्क और लंबी अवधि में आपूर्ति के लिए कीमतों में स्थिरता के पहलू भी शामिल किए गए हैं।

फिक्की ने कहा कि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए खनिज संसाधनों के आवंटन की प्रक्रिया में समानता लाने की जरूरत है।

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