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समय से लड़ रहे थे कोलंबिया अंतरिक्ष यात्री

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि वर्ष 2003 में हादसे का शिकार हुए अंतरिक्ष यान कोलंबिया के यात्रियों के पास यान को सुरक्षित बचाने का कोई रास्ता नहीं बचा था। नासा के उप प्रशासनिक अधिकारी वेन हेल ने इस संबंध में एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि कोलंबिया यात्रियों को एक फरवरी 2003 को जो चीज सामान्य लग रही थी वही अगले दिन इतनी तेजी से एक ऐसे बड़े हादसे में तब्दील हुई कि उन्हें पास उनके हेलमेट के आगे लगे शीशे को भी बंद करने का मौका नहीं मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हादसे के ठीक पहले बजने वाले अलार्म के कारण कोलंबिया के यात्रियों ने काकपिट के स्विचों को बंद करने के साथ ही यान के आटोपायलट प्रणाली में भी बदलाव किए थे। हेल ने कहा कि कोलंबिया यान के बटनों की स्थिति को देखकर हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यान के यात्रियों ने बेकाबू यान पर फिर से नियंत्रण प्राप्त करने के लिए बहुत प्रयास किया। लेकिन तेजी से कम हो रहे हवा के दबाव के कारण यात्री संभवत: बेहोश हो गए और चिकित्सकीय जांच में यह भी बात सामने आई है कि हो सकता है कि यात्री फिर दोबारा होश में नहीं आ पाए हों। हेल ने कहा कि इस रिपोर्ट से इस बात की पुष्टि होती है कि हादसे से पहले कोलंबिया यान के यात्रियों ने अपने यान पर नियंत्रण के लिए काफी प्रयास किए लेकिन वे इस दुर्घटना को टालने में असफल रहे। उल्लेखनीय है कि अंतरिक्ष से टेक्सास स्थित कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र पर उतरते समय जमीन से 20 किलोमीटर ऊपर कोलंबिया यान में आग लगने के बाद विस्फोट हो गया था। इस हादसे के लिए यान के पंखों में एक छेद को जिम्मेदार माना गया जिससे 16 दिन पहले प्रक्षेपण के समय गिरा फोम का एक टुकडा टकरा गया। इस हादसे में इजरायल के पहले अंतरिक्ष यात्री इलान रामोन और भारतीय मूल की कल्पना चावला सहित यान के कमांडर रिक हस्बेंड, पायलट विलियम मैक्कूल तथा यात्री माइकल एंडरसन, डेविड ब्राउन और लारेल क्लार्क मारे गए थे।

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