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चीन को 2015 तक पछाड़ देगा भारत

भारतीय अर्थव्यवस्था के इस दशक में औसतन 9.4 प्रतिशत की दर से विकास करने का अनुमान है और यह वर्ष 2015 तक सर्वाधिक विकासशील अर्थव्यवस्था के बल पर चीन को भी पछाड़ देगी।

चीन, कोरिया, जापान और भारत के तुलनात्मक अध्ययन में निजी क्षेत्र के आईसीआईआई बैंक ने वर्ष 2030 तक के विकास का खाका खींचा है। 'भारत, विकास, अवसर और चुनौतियां' में बताया गया है कि कुशल कामगार, उत्पादन में बढो़त्तरी, तकनीक, ढांचागत विकास और बाजार के बल पर भारत की अर्थव्यवस्था सर्वाधिक विकासशील हो जाएगी।

ग्रामीण शुद्ध घरेलू उत्पाद में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी आद्यौगिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 27.5 प्रतिशत के मुकाबले 41.7 प्रतिशत रही। इसमें कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। शहरी क्षेत्रों में विकास दर के वित्त वर्ष 2010 के 53.6 प्रतिशत के मुकाबले वर्ष 2030 तक बढ़कर 70 प्रतिशत होने का अनुमान है।

दूसरे एशियाई देशों में देखा गया है कि विकास दर में यह वृद्धि पूंजी के इकट्ठा होने के कारण हुई है। निवेश में मुख्यतः आधारभूत ढांचों के विकास पर बल दिया जाएगा क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि इससे विकास दर दो अंकों में बढे़गी। इस अध्ययन में यह बताया है कि आधारभूत ढांचों में निवेश के लिए विदेशी पूंजी पर निर्भर होना पडे़गा। इसलिए जरूरी है कि धन उपलब्ध कराने के दूसरे स्रोत तलाशे जाएं।

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