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भीख मांगने में भी व्यावसायिकता

साथ रहने की इच्छा ही धर्म ‘अराजकता की आग और चुप बैठी सरकार’ लेख में भारत देश में फैली अराजकता और समाज में बढ़ती जा रही दरारों का विस्तृत वर्णन किया है। जनता की एक रहने की इच्छा को ही धर्म कहा गया है। श.द. लघाटे, रामकृष्णपुरम, नई दिल्ली बंद सिनेमाघरों का फसाना विद्यार्थी जीवन में झंडेवालान का नाज सिनेमा, पुरानी सब्जी मंडी का पैलेस सिनेमा, चांदनी चौक के जुबली-कुमार, सिनेमा हॉलों का अपना ही रुतबा था। यहां पर काम करने वाले टार्चमैन, बुकिंग क्लर्क, गेटकीपर भी क्रमश: पंडित जी, भगत जी, प्रधान जी, मुल्ला जी के नाम से जाने जाते थे। यहां पर कम बजट में परिवार सहित, स्नेक्स के साथ फिल्म का लुत्फ उठाया जाता था। परंतु आज मल्टीप्लेक्स रूपी बड़ी मछलियों ने इन पुरानी व नई दिल्ली की यादों को निगल लिया है। मल्टीप्लेक्स व कर्मशियल कम्प्लेक्स के हिसाब से अपनी जवानी झोंक कर इन पुराने सिनेमाघरों को मुनाफा ही मुनाफा दिलवाने वाले कर्मचारी अब अनफिट की श्रेणी में आ गए हैं। राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली संजोइए सपने जरूर दीवालिया हो चुकेड्ढr मंदी की मार से घायलड्ढr छटपटाते देशों के सपनेड्ढr उतार फेंकिए अपनी आंखों सेड्ढr अपने घर-गांव की हरियाली केड्ढr अपने वतन की खुशहाली केड्ढr संजोइए सपने जरूर।ड्ढr कविता चम्पा, नैनीताल, उत्तराखंडड्ढr नए साल की बधाईड्ढr देता हूं मैं समस्त भारतवासियों को नए साल की बधाईड्ढr चाहे कोई हिंदू, मुस्लिम, सिख हो या हो ईसाईड्ढr रोशन लाल बाली, महरौली, नई दिल्लीड्ढr नव वर्ष का पैगामड्ढr हर दिन होली रात दिवाली, ऐसी सुबह और शाम होड्ढr यश-कीर्ति ब्रह्मांड में गूंजे, हर जुबां पे आपका नाम होड्ढr भय आतंक मिट जाए जग से, हर जगह रहीम और राम होड्ढr अलविदा हो जाए खुद-दर्द सभी, नववर्ष का यह पैगाम हो।ड्ढr नवल किशोर सिंह, बुराड़ी, दिल्लीड्ढr ब्लू लाइन बनी किलर लाइनड्ढr ब्लू लाइन ने बना ली किलर लाइन पहचान।ड्ढr जाने कब किसको कुचल, पहुंचा दे श्मशान।। चतुव्रेदी वीरेन्द्र विक्रम, नई दिल्ली सूर्य अस्त कर्मचारी मस्त लुधियाना के ढंढारीकलां स्टेशन के गार्ड ने तो हद ही कर दी। वे साहब तो डय़ूटी के दौरान ही टल्ली हो गए और ठंड में मुफ्त की दारू लम्बी ही खींच गए। यह तो भला हो नई दिल्ली-ाम्मू झेलम एक्सप्रेस के उस ड्राइवर का जिसने अपनी सूझबूझ से स्थिति को भांप लिया और किसी भी हादसे से यात्रियों को बचा लिया। ऐसे बेवड़ों से प्रशासन को सख्ती से पेश आना पड़ेगा। वर्ना कार्य-डय़ूटी के दौरान लापरवाही बढ़ती ही जाएगी। - राजेन्द्र कुमार सिंह, एच-101, आर्य अपार्टमेंट, सेक्टर-15, रोहिणी, दिल्ली

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