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मोबाइल से रेडिएशन का स्तर बताना होगा जरूरी!

मोबाइल से रेडिएशन का स्तर बताना होगा जरूरी!

मोबाइल हैंडसेट की रेडियो तरंगों की ऊर्जा से शरीर पर प्रभाव को लेकर बढ़ रही आशंकाओं के बीच अब भारत में भी हैंडसेट के रेडियो तरंग ऊर्जा विकिरण स्तर को निरापद स्तर तक सीमित रखने का नियम अनिवार्य किए जाने की मांग जोर पकड़ चुकी है।

मोबाइल हैंडसेट उद्योग के लोगों का कहना है कि इस विषय में सरकार से बातचीत चल रही है और जल्द इस बारे में दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार मोबाइल हैंडसेटों पर रेडिएशन यानी स्पेसिफिक एब्जार्बशन रेट (सार) के स्तर का उल्लेख अनिवार्य किया जा सकता है।

मोबाइल हैंडसेट क्षेत्र की कंपनी इन्टेक्स टेक्नोलॉजीज के सेंटर फॉर डिजाइन एंड डेवलपमेंट प्रमुख देबू दासगुप्ता ने कहा कि देश में अभी भी मोबाइल रेडिएशन को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं हैं। 2.0 वॉट प्रति किलोग्राम की स्वीकृत दर से अधिक का रेडिएशन छोड़ने वाले हैंडसेटों की बिक्री पर पूर्णतया रोक लगनी चाहिए।

हैंडसेट विनिर्माताओं के संगठन, इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन (आईसीए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज महेंद्रू कहते हैं कि ज्यादातर ब्रांडेड हैंडसेट रेडिएशन मानदंडों को पूरा कर रहे हैं। ग्रे मार्केट में जरूर ऐसे हैंडसेट बिक रहे हैं, जो इन पर खरे नहीं उतरते।

ऐसे उपकरणों के प्रयोग के समय शरीर के प्रति इकाई हिस्से में प्रवेश करने वाली रेडिया तरंग जनित ऊर्जा की मात्रा की गणना वॉट प्रति किलोग्राम आधार पर की जाती है।

अमेरिका में सार की निरापद सीमा 1.6 वॉट प्रति किलोग्राम, यूरोप में 2.0 वॉट प्रति किलोग्राम निर्धारित है। जिस मोबाइल फोन उपकरण में सार का स्तर जितना कम होगा वह उतना ही अधिक सुरक्षित माना जाएगा।

इंटेक्स के दासगुप्ता ने हैंडसेट की पैकिंग पर उसके सार के स्तर का उल्लेख अनिवार्य करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि देश में ग्राहकों में मोबाइल रेडिएशन को लेकर जागरुकता नहीं है। दासगुप्ता कहते हैं कि आमतौर पर सार का परीक्षण काफी महंगा पड़ता है, इसलिए गैर ब्रांडेड विनिर्माता इससे बचते हैं। उन्होंने कहा कि विनिर्माताओं को हैंडसेट के सार स्तर का उल्लेख अपनी वेबसाइट पर करना चाहिए।

महेंद्रू ने कहा कि हमने अपने सभी सदस्यों को इस बारे में स्पष्ट दिशानिर्देश दिए हैं कि वे रेडिएशन के मामले में अंतरराष्ट्रीय मापदंडों को अपनाएं। आईबॉल मोबाइल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुतिक्षण नैथानी भी मानते हैं कि मोबाइल रेडिएशन के नियम स्पष्ट होने चाहिए। नैथानी ने कहा कि ब्रांडेड हैंडसेट सार के सर्टिफिकेशन के साथ आते हैं, पर ग्रे मार्केट में बिकने वाले हैंडसेट इन मानकों पर खरे नहीं उतरते।

एयरफोन लि. के निदेशक विशाल चितकारा ने कहा कि ग्राहकों को निश्चित रूप से यह पता होना चाहिए कि वे जो हैंडसेट खरीद रहे हैं, उसका रेडिएशन का स्तर क्या है। लान्गटेल इंडिया लि. के परिचालन प्रमुख रोशन कुमार ने कहा कि सार के स्वीकृत स्तर पर खरे न उतरने वाले हैंडसेटों के विनिर्माण तथा आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।

देश में हैंडसेट का सालाना बाजार 15 करोड़ इकाइयों का है। उल्लेखनीय है कि दूरसंचार विभाग (डॉट) की एक अंतर मंत्रालयी समिति ने हैंडसेटों के लिए सार का स्तर 1.6 वॉट प्रति किलोग्राम तय करने की सिफारिश की है। साथ ही समिति ने सुझाव दिया है कि सार के स्तर का उल्लेख हैंडसेट पर ही किया जाना चाहिए।

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