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राजरंग

साल बीत गया, अब आगे ध्यान दीजियेसाल बीत गया। नवबेला का अंकुर प्रस्फुटित हो गया। पूरा साल तो जुबान से काम चला। विकास हुआ तो सिर्फ मीठी जुबान का। भाषा सुधरी, राजनीति में मेच्योर हुए। भाषण देने का अंदाज बदला। घर परिवार का ग्राउंड स्ट्रांग हुआ। अब इ जो नया साल आया है, खूब बधाई मिल रही होगी। लेकिन बधाई ग्रहण करने में दिन बरबाद मत कीािये। इ सब तो सालों भर चलते रहता है। तनिक पब्लिको पर ध्यान दीजिए। उनकी मंगलकामना कीािए। काहे कि यही साल सबका रिाल्ट भी आयेगा। रिाल्ट बड़ी डोंरस चीज होती है। अगर परिणाम पक्ष में नहीं आया तो बहुते टेंशन मिलता है। फिर जुबान और तेज चलेगी। तेज चलेगी तो अमंगल होगा। विकास नहीं होगा। देखिये अभी एगो चुनाव होने वाला है। सब कुछ अच्छा चल रहा है। सब पब्लिक से मीठी-मीठी बातें कर रहा है। ऐसी बात साल भर होनी चाहिए। पब्लिक भी खुश रहेगी। डेली क्षेत्र में एक झलक दिखायेंगे, और मीठी-मीठी बातें करंगे, तो पब्लिको विकास नाम का जप करना भूल जायेगी। जहां पब्लिक को छोड़े, विकास नाम का जप फिर शुरू हो जायेगा। अगर इ वाला जप शुरू हुआ तो फिर आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और उठा-पटक का सिलिसिला शुरू हो जायेगा। इसको हटाओ उसको जोड़ो कार्यक्रम शुरू होगा। इसको संभालना बड़ी मुश्किल होता है। समझे न, इससे अच्छा है कि विकास करा दीजिए।

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