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चेचक से पीड़ित बच्चों का नहीं करा रहे इलाज

सरकार चाहे लाख दावे कर ले महादलितों खासकर मुसहर परिवारों का जीवन-स्तर अब तक नहीं सुधरा है। विश्वास नहीं होता तो सियारामपुर मुसहरी आइए। मुसहरी में घुसते ही चहुंओर गंदगी, भूखे-नंगे कुपोषित बच्चे व अंधविश्वास में जकड़े लोगों को देख जमीनी हकीकत खुद पता चल जाएगा। करीब दो सौ घरों वाली इस बस्ती में अब भी आधे से अधिक लोग तीन-चार फीट ऊंची दरबेनुमा फूस की झोपड़ियों में रहने की विवश हैं। क्योंकि इनके इंदिरा आवास अबतक नही बने। करीब 6 सौ लोगों की इस बस्ती में मात्र तीन चापाकल ही हैं। चापाकल भी ऐसे कि पानी लेने वाला स्वस्थ इंसान भी बीमार हो जाए। क्योंकि चापाकर के इर्द-गिर्द गंदगी ही गंदगी दिखी।ड्ढr ड्ढr बस्ती के पचासों बच्चे चेचक जैसी बीमारी से पीड़ित हैं। लेकिन शिक्षा के अभाव में लोग इसे बीमारी नहीं दैवी प्रकोप मान इलाज के बदले देवी मां की पूजा कर रहे हैं। नतीजतन मर्ज बढ़ता ही जा रहा है। गरीबों की इस बस्ती में स्कूल नहीं है। यहां से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्कूल हैं। दूरी के चलते अधिसंख्य बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। ऐसे में सियारामपुर मुसहरी के नैनिहालों का क्या होगा भविष्य, खुद ही अंदाजा लगा लीजिए। कुल मिलाकर मुसहरी अब भी कई बुनियादी सुविधाओं से महरूम अभावग्रस्त जिंदगी की जीती-जागती तस्वीर बनी हुई है। हालांकि मुखिया रीना देवी ने कहा कि चाहे जॉब कार्ड हो या बीपीएल सूची या अन्य योजनाएं सभी का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे इसके लिए पूरी कोशिश करती हूं। इनमें थोड़ी जागरूकता की कमी है, इसलिए सबको मिलजुलकर प्रयास करना चाहिए।

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