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आत्माओं की ड्रेस

हैप्पी न्यू ईयर कहना बकार है, इसलिए कि बंदा आज की तारीख मं खुदै ही कनफर्म नहीं है कि हैप्पी होगा या नहीं। आलू के भाव इस साल भी उस लवल पर नहीं जायंग, किसी आलू वाल न आश्वस्त नहीं किया है, सो फिर काह हैप्पी हो लं जी। हैप्पीनस अब आलू वालों, प्याज वालों के एक्शन मं निहित है। बची-खुची हैप्पीनस का ठका पाकिस्तान के पास है। एस में भी जिसका बूता हो, वह हैप्पी हो जाय। साल के पहल दिन कई तरह के ज्ञान हासिल किय हैं। बमबाजी के इस माहौल मं यह प्रवचन फुल जोरदारी स समझ मं आ गया है कि आत्मा अजर-अमर है, शरीर तो चोला है। थैंक्स टू बम, कसब, जरदारी, आत्मा को नयी ड्रस बहुत जल्दी-जल्दी मिलन का जुगाड़ हो लिया है। जैस हो सकता है कि यह खाकसार अभी दिल्ली मं टं बोल, फिर कल नय चोल मं मुंबई मं आय, वहां भी बमों मं नया चोला मिल जाय। इस हिसाब स दखं, तो आत्माएं बहुत खुश होंगी, इन दिनों धुआंधार नयी ड्रस मिलन का सीजन है। आत्माओं की बातचीत इस प्रकार होती होगी आजकल-क्यूं री कल ही तू गयी थी, नयी ड्रस पहनकर,रात मं फिर वापस आ ली। हां री कसब, जरदारी, गिलानी वगैरह बहुत ओवरटाइम कर रह हैं। मर साथ वाली आत्मा को तो दो दिन मं पांच नयी ड्रसं मिल गयीं। रीयली, भई नयी ड्रसबाजी मं एसी मौज तो कभी ना हुई आत्माओं की। आत्माएं एक-दूसर की नयी ड्रस को न्यू पिंच करके आग चली जाती होंगी। हैप्पी हो लीजिय, अगर बूता है, बावजूद इस फेक्ट है कि नौकरियां जा रही हैं। बीस हजार का बंदा निकालकर कंपनियां दोगुना काम करान के लिए दस हजार रुपय का बंदा रख रही हैं। जिसकी नौकरी गयी है, उस समझ मं आ रहा है-जो आज तरा था, वह कल किसी और का होगा। उसके बाद के कल को किसी को और का होगा। जो नौकरियां अमरिकनों की थीं, वह सस्ती आउटसोसिर्ंग के हल्ले मं गुड़गांव वालों की हो गयीं, अब और सस्त के चर मं चीन की हो जायंगी। जो कार तून लोन पर ली थी, वह पहल शोरुम वाल की थी, अब लोन ना चुकान पान की वजह स पहलवान लोगों की हो जायगी। यहां पा कुछ नहीं है, (पाकिस्तान की बईमानी और बुश की बवकूफी को छोड॥कर)। यह फंडा जिसकी समझ मं आ गया, उस नौकरी और कार जान के मामल मं कष्ट मं नहीं होता। खैर चलिए, हैप्पी 200अगर हो सकत हैं, तो हो जाइय।

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  • Web Title: आत्माओं की ड्रेस