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राजरंग

ाहां रहो मिसाल कायम करो..बड़े साहब जहां रहते हैं, मिसाल कायम करते हैं। सुबह आठ बजे कार्यालय में बैठते हैं, तो रात को नौ बजे कामकाज निबटा कर ही उठते हैं। पहले बहुत कोशिश किये कि राज्य में उद्योग लगें। सब कंपनियों को माइंस मिल जाये। खूब नियम कानून भी बनाये। लेकिन सड़क के इांीनियर साहब लोगों से पार नहीं पा पाये। दौरा कर सड़कों को चिकना और सरपट बनाना चाहे। इांीनियर लोग ऐसा दांव मार कि सूर्य के नाम राशि कुमार सिंह साहब योजना बनाने के लिए भेज दिये गये। कहा गया कि यहां आपकी जरूरत है। किसी तरह से राज्य के पर्यटक स्थलों को सुधारने का काम मिल गया, लेकिन यहां भी फेरा। पूर्व वजीर के चेले हावी रहे। साहब सेमिनार करने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे थे। भला हो एक सज्जन का, जिनके चलते सिटी बस चलाने पर सरकार मजबूर है। साहब के पास निगम है। उसी निगम से बस चलेगी। साहब अब एक और नया इतिहास रचने की ओर अग्रसर हैं। जब नया काम पाते हैं, तो फूले नहीं समाते। टाई सूट और कड़ा कर पहनेंगे और सीटी बजाकर बस चलने की आज्ञा देंगे। हरी झंडी दिखायेगा कोई और।

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