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जांच के दायर वाले शिक्षकों को प्रोन्नति नहीं

बिहार सरकार के मानव संसाधन विभाग ने सूबे के सभी विश्वविद्यालय के शिक्षकों के वर्षो से लंबित प्रोन्नति के मामले को दुरुस्त करने लिए सभी कुलपतियों लेटर भेज दिया है। सभी विश्वविद्यालयों में इसकी प्रकिया भी शुरू हो चुकी है। विभाग ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि उन शिक्षकों को प्रमोशन नहीं दिया जाए जो जांच के दायर में हैं। सूबे के ग्यारह विश्वविद्यालयों में लगभग ऐसे शिक्षकों की संख्या 1050 है जिनकी नियुक्ित 2003 में हुई थी। वे ही जांच से प्रभावित होंगे। इस जांच प्रक्रिया से पटना विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रभावित होंगे। इन सभी शिक्षकों की सेवा संपुष्टि हो चुकी है लेकिन ये प्रमोशन के आशा में हैं। हालांकि विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया है की किन शिक्षकों पर जांच की प्रक्रिया चल रही है।ड्ढr ड्ढr बिहार सरकार ने शिक्षकों को नए वेतन देने के लिए शिक्षकों की वास्तवित स्थिति जाना चाहा है, ताकि उनके पद के अनुसार ही बिहार सरकार भारत सरकार से पैसे की मांग कर सके। भारत सरकार ने 28 फरवरी को ही सभी मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर वेतन संबंधी मामले जानकारी दे दी है। इसके तहत से व्याख्याता को वरीय व्यासख्याता, वरीय व्याख्याता को रीडर और रीडर को प्रोफेसर में प्रोन्नति की जाएगी। विश्वद्यालयों में नए वेतनमान का लाभ दिया जा सके इसके लिए विभाग पूरा खाका तैयार कर रहा है। पूटा के महासचिव रणधीर कुमार सिंह ने कहा कि सभी बैच के शिक्षकों का प्रमोशन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों पर जांच की प्रकिया चल रही है उन्हें भी प्रोन्नति मिले। इन्हें छोड॥कर प्रमोशन देना घोर अन्याय होगा। उन्होंने बताया की शिक्षकों के प्रोन्नति के लिए मई को पटना विश्वविद्यालय के कुलपति डा. श्याम लाल के समक्ष प्रदर्शन किया जएगा।ं

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