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मर रहे झालको कर्मचारी आश्रित को नौकरी नहीं

झालको गठन के बाद भी सिंचाई कर्मियों का दर्द और गम खत्म नहीं हुआ। 31 दिसंबर की रात एक और झालकोकर्मी की मौत हो गयी। दुमका में पदस्थापित जंजीर वाहक सुरश मंडल की मौत की खबर मिलते ही अखिल झारखंड कर्मचारी महासंघ और झारखंड राज्य कर्मचारी महासंघ ने सरकार से परिानों को न्याय दिलाने की गुहार लगायी है। संघ के अध्यक्ष दुर्गा कच्छप, महासचिव घनश्याम रवानी, सचिव रामभद्र झा और राज्य कर्मचारी महासंघ के महासचिव विद्यानंद विद्यार्थी ने सीएम शिबू सोरन, सिंचाई मंत्री कमलेश सिंह और सचिव डीके तिवारी से तत्काल पहल का अनुरोध किया है।ड्ढr कर्मचारी नेताओं ने सरकार को एक सूची भी सौंपी है। इसमें बताया गया है कि चार साल में मरने वाले कर्मचारियों की संख्या 21 हो गयी है। 2004-05 में तीन-तीन, 06 में दो, 2007 में आठ तथा 2008 में आठ कर्मचारियों की मौत विभिन्न कारणों से हो गयी। तंगहाली तथा मानसिक प्रताड़ना झेलने वाले कर्मचारी रह-रहकर दम तोड़ रहे हैं। किसी कर्मचारी के परिान को अब तक अनुकंपा पर नौकरी नहीं मिली।ड्ढr मंत्री-सचिव ने सहानुभूति जतायी, पर आश्रितों को नौकरी नहीं मिली। कर्मचारियों की विधवा और बच्चे दाने-दाने को मोहताज हैं। इधर, सुरश की मौत पर संघ ने दो मिनट का मौन रखकर शोक जताया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से ले। संघ ने मानवाधिकार को भी इस बार में जानकारी देने और आंदोलन करने का निर्णय लिया है। (हिब्यू)

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