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2.40 लाख छात्र विशेष शिक्षा से वंचित

छात्रों को क्वालिटी एजुकेशन उपलब्ध कराने के लिए लाख योजनाएं बनीं, लेकिन यह फाइलों तक ही सिमटकर रह जाती हैं। इसका ताजा उदाहरण है कि इस साल 3.08 लाख कमजोर छात्रों को विशेष शिक्षा देने का लक्ष्य तय किया गया था, जबकि 65 हाार छात्रों को ही विभाग इस योजना से जोड़ पाया। अब भी 2.40 लाख छात्रों को क्वालिटी एजुकेशन नहीं मिल पाया है। सबसे मजेदार यह है कि 17 जिलों ने इस दिशा में कोई प्रयास ही नहीं किया।ड्ढr वित्तीय वर्ष 2008-0में 308263 छात्रों को विशेष शिक्षा देने का जिलावार लक्ष्य निर्धारित था। शिक्षा पदाधिकारियों की लापरवाही के कारण यह योजना धरातल पर नहीं उतर पायी। हालांकि एचआरडी ने समीक्षा के दौरान इसे गंभीरता से लिया। शिक्षा सचिव रविशंकर वर्मा ने इस योजना को प्राथमिकता के आधार पर निष्पादित करने का निर्देश भी दिया।ड्ढr साहेबगंज, दुमका और रांची ही ऐसे जिले हैं, जहां शत-प्रतिशत छात्रों को इस अभियान से जोड़ा गया है। इसके अलावा धनबाद, जामताड़ा, प सिंहभूम और लातेहार ने इस दिशा में कदम जरूर बढ़ाये हैं। लेकिन शत-प्रतिशत उपलब्धि हासिल नहीं की जा सकी। प्रमंडलवार स्थितिड्ढr प्रमंडललक्ष्यउपलब्धिड्ढr उ छोटानागपुर1165द छोटानागपुर447861ोलहान361507856ड्ढr संथाल परगना64पलामू45705245विसंगति की ओर ध्यान आकृष्ट करायारांची। राष्ट्रीय कोयला मजदूर कांग्रेस : महासचिव केएन सिंह ने श्रमिक संगठनों का ध्यान वेतन और सुविधा में विसंगति की ओर आकृष्ट कराया है। उन्होंने अधिकारी की तरह कामगारों का वेतन भी ग्रेडवाक्ष प्रतिशत में बढ़ाने और फिक्सेशन प्वाइंट टू प्वाइंट किये जाने की मांग की है। कहा कि एटेंडेंस बोनस को न्यूतनम वेतन के एक हिस्से के रूप में शामिल किया जाता है। ऐसी स्थिति में इस पर भी पीएफ और पेंशन कटना चाहिए। तीन दिन के आकस्मिक अवकाश पर एलटीसी-एलएलटीसी दिये जाने का प्रावधान होना चाहिए। अधिकारी और कामगार एक ही परिवेश में काम करते हैं। इसके मद्देनजर उनकी मेडिकल सुविधा समान होनी चाहिए। वाहन भत्ता मासिक, साल में 30 दिन वार्षिक छुट्टी और पांच प्रोमोशन मिले। रिटायर होने के बाद घर तक जाने और सामान ले जाने के लिए पैसा भी दिया जाना चाहिए।ड्ढr प्रोफिट बढ़ा, बेनेफिट घटाड्ढr दी झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन : महासचिव सनत मुखर्जी ने कहा कि कोल इंडिया का प्रोफिट बढ़ने के साथ कामगारों का बेनेफिट घटा है। छठे वेतन समझौते के वक्त कई कंपनियां बीआइएफआर में थीं। मैनपावर भी अधिक था। उस वक्त प्रतिशत वेतन बढ़ा था। आज कोल इंडिया नवरत्न कंपनी बन गयी है। मैनपावर काफी कम गया है। कंपनी को 24 दिसंबर तक 6435 करोड़ का लाभ हुआ है। पिछले वर्ष के लाभ से यह 276रोड़ अधिक है। इसके बाद भी कामगारों को वेतन और सुविधा देने के लिए पैसे नहीं हैं। पांचों श्रमिक प्रतिनिधियों के नतमस्तक हो जाने से यह स्थिति पैदा हुई है।ड्ढr फूट डालने की साजिशड्ढr ऑल इंडिया सेट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस : कोल इंडिया में दस साल के समझौते की वकालत करने को कामगारों में फूट डालने की साजिश करार दिया। संगठन के महासचिव शुभेंदु सेन ने कहा कि अपनी एकाुटता से कामगारों ने उसे खारिा कर दिया। कोल इंडिया एक मात्र पीएसयू है, जहां पांच साल का वेतन समझौता होता है। पांच से सात जनवरी की हड़ताल में यूनियन की सक्रिय भागीदारी होगी।ड्ढr तब हर साल हो समझौताड्ढr इंटक दुबे गुट : सीसीएल मुख्यालय सचिव जर्नादन सिंह ने कहा कि दस साल में कम और पांच में अधिक बेसिक देने की बात मात्र बचकाना बयान है। कम अवधि में ही अधिक बेसिक मिले, तो यहां हर साल का समझौता होना चाहिए। श्रमिक प्रतिनिधियों को पांच साल की जिद छोड़ कर एक साल के समझौते की पहल करनी चाहिए। इससे उनकी भी चांदी रहेगी।

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