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मंदी की चपेट में 3 जी सेवा

सरकार का 3ाी मोबाइल सेवा के स्पेक्ट्रमों की नीलामी करके चार हाार करोड़ रुपये सरकारी खजाने में डालने का इरादा धूल में मिलता नजर आ रहा है। दरअसल वैश्विक मंदी से त्रस्त टेलीकॉम सेक्टर की चोटी की बहुराष्ट्रीय कंपनियां इस सेवा के स्पेक्ट्रम लेने को लेकर काफी ठंड़ा रुख अपना रही हैं। दूर संचार विभाग के सूत्रों का कहना है कि अभी तक सिर्फ अमेरिका की एटीएंडटी तथा इंटेल ने ही स्पेक्ट्रम लेने को लेकर किसी तरह का उत्साह दिखाया है। इस महीने की 16 तारीख को स्पेक्ट्रमों की नीलामी के लिए बोली होनी है। सूत्रों का कहना है कि कई नामवर मोबाइल कंपनियां जसे वेरीाोन, ब्रिटिश टेलीकॉम, ओरां, केबल एंड वायरलेस, डय़ूश टेलीकॉम,टेलीस्ट्रा बोली से अपने को दूर रख सकती हैं। दरअसल 3 जी स्पेक्ट्रम के आवंटन के मसले पर विगत 23 दिसम्बर को हुई शुरूआती कांफ्रेंस में उपयरुक्त कंपनियों का कोई भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। इसकी दो वजहें बताई जा रही हैं। पहली, स्पेक्ट्रम के बेस प्राइज का बहुत अधिक होना। इन्हें अखिल भारतीय स्पेक्ट्रम का बेस प्राइज 2,020 करोड़ रुपये जरूरत से अधिक लगा। जबकि ताजा सूरते हाल यह है कि वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को दूरसंचार विभाग से कहा है कि वह 3ाी मोबाइल फोन के अखिल भारतीय स्पेक्ट्रम का रिार्व दाम 4,040 करोड़ रखे। जाहिर है इस नई व्यवस्था के बाद रही-सही बहुराष्ट्रीय मोबाइल कंपनियों के भी बोली से दूर रहने की आशंका पैदा हो गई। दूसरा, विशेषज्ञ मान रहे हैं कि भारत में 3 जी सेवा को बहुत ग्राहक नहीं मिल पाएंगे। पश्चिमी देशों में जिधर यह सेवा चालू हो चुकी है,वहां पर भी इसने कोई बहुत झंडे नहीं गाढ़े हैं। कारण यह है कि इसके टेरिफ रट काफी अधिक रहते हैं। दूरसंचार मंत्रालय के एक आला अधिकारी ने कहा कि भारत की तीन बड़ी मोबाइल कंपनियों क्रमश: रिलायंस इंफोकोम, वोडाफोन और भारती एयरटेल ने सरकार से अनौपचारिक रूप से आग्रह किया कि वे विश्वव्यापी मंदी की रोशनी में 3ाी स्पेक्ट्रमों के आवंटन की प्रक्रिया को कुछ समय के लिए टाल दें। लेकिन इनकी सलाह को दरकिनार कर दिया गया।

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