DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मसीही समुदाय के लिए चुनौतियों से भरा रहा बीता साल

वतंत्र पास्टरों के फर्ाीवाड़े, नेम्हा बाइबल प्रकरण और कंधमाल सहित देश के अन्य हिस्सों के मसीहियों पर हुए हमलों ने झारखंड के मसीहियों को पूर वर्ष उद्धेलित रखा। पिछले साल 16 जुलाई को दैनिक हिन्दुस्तान ने नकली पास्टरों द्वारा राज्य के दस हाार लोगों से लगभग एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का मामला प्रकाशित किया। इन पास्टरों ने लोगों को फांसने के लिए गुड शेफर्ड मिनिस्ट्री और जेम्स जसी मसीही संस्थाओं के नाम का इस्तेमाल किया था। इस मामले में एफआइआर हुआ। अनुसंधान का काम जारी है।ड्ढr स्वतंत्र पास्टरों के कारनामों से मुख्यधारा के चर्च कई बार निशाने पर आये। प्रलोभन देकर धर्मातरण का आरोप लगाते हुए आरसी चर्च के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल तेलेस्फोर पी टोप्पो का पुतला दहन किया गया, जबकि आरोप स्वतंत्र पास्टरों पर था। इन घटनाओं को देखते हुए ऑल चर्चेज कमेटी ने सदस्यता के नियम कड़े कर दिये।ड्ढr 22 सितंबर को केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने संवाददाता सम्मेलन कर बाइबल सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित बाइबल के कुडख़ (उरांव) संस्करण में सरना धर्म विरोधी बातें होने का आरोप लगाया।ड्ढr झारखंड में अपने 163 वर्ष के इतिहास में चर्च पहली बार बैकफुट पर नजर आया। इस प्रकरण के कारण ईसाई और सरना आदिवासियों के बीच की रखा कुछ गहरी दिखी। ईसाई आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिले या नहीं, यह इस पूर प्रकरण की अंतर्धारा बनी।ड्ढr ऑल चर्चेज कमेटी और बाइबल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने नेम्हा बाइबल मे छपी बातों के लिए सरना समाज से माफी मांगी ।ड्ढr इधर, मामले को सतह पर लाने वाले केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष ने 1अक्तूबर को सरना महापंचायत बुलायी और इसके आयोजन के लिए सरना रक्षा मंच का गठन किया। माहौल को शांत करने के लिए राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा, आदिवासी छात्र संघ और ऑल चर्चेज कमेटी के बीच 11 अक्तूबर को समझौता हुआ, जिसमें ईसाई और सरना आदिवासियों से बीच विवाद के विषयों का स्थायी समाधान ढूंढ़ने का प्रयास किया गया।ड्ढr आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष चमरा लिंडा ने आरोप लगाया कि संघ समर्थक इस मामले को तूल देकर आदिवासी समाज में विभाजन लाना चाहते हैं।ड्ढr सरना रक्षा मंच ने चर्च, राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा और आदिवासी छात्र संघ के बीच हुए समझौते को खारिा कर दिया। 1अक्तूबर को महापंचायत हुई। प्रतिपक्ष के नेता अजरुन मुंडा, विधायक समीर उरांव और चंद्रेश उरांव सहित कई भाजपा नेताओं की उपस्थिति के कारण इसपर हिंदुत्व समर्थित और भाजपा प्रायोजित होने का आरोप लगाया गया। महापंचायत के बाद सरना रक्षा मंच में बिखराव के चिह्न् परिलक्षित हुए। इस बीच धुर्वा में अक्तूबर में होने वाले अंतरराष्ट्रीय मसीही सुसमाचार प्रचारक, डॉ पॉल दीनाकरण का कार्यक्रम अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दिया गया।ड्ढr झारखंड उच्च न्यायालय ने इस वर्ष 12 जून को ईसाई आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का संवैधानिक अधिकार दिये जाने के खिलाफ दायर एक पीआइएल और रिट याचिका खारिा कर दी, जिसका ईसाइयों ने स्वागत किया। कंधमाल सहित देश के अन्य हिस्सों में मसीहियों पर हुए हमले ईसाइयों के लिए चिंता के प्रमुख कारणों में रहे। इसके मद्देनजर ईसाइयों ने इस वर्ष क्रिसमस पर्व काफी सादगी से मनाया। ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: मसीही समुदाय के लिए चुनौतियों से भरा रहा बीता साल