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निराश निर्यातकों की सरकार से लगाई गुहार

अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों की हालत खराब होने से लगातार लडख़ड़ाते घरेलू निर्यात को संभालने के लिए घोषित प्रोत्साहन पैकेा पर निर्यातक समुदाय ने असंतोष जताया है। उनके मुताबिक इसके जरिये निर्यात की गिरती हालत को संभालना बिलकुल असंभव है। लिहाजा, भारी-भरकम प्रोत्साहनों की जरूरत है। इस सिलसिले में निर्यातकों के प्रतिनिधि संगठन फेडरशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट्स ऑर्गेनाक्षेशंस (फियो) ने वाणिज्य एवं वित्त मंत्रालयों को संपर्क कर अतिरिक्त प्रोत्साहनों की मांग की है। फियो महानिदेशक अजय सहाय के मुताबिक मौजूदा प्रोत्साहन ठीक हैं लेकिन इनके जरिए निर्यात को पूरी तरह से संभाल पाना मुश्किल हो जाएगा। अब बड़े प्रोत्साहनों की जरूरत को ध्यान में रखते हुये वाणिज्य एवं वित्त मंत्रालयों को प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को घरलू निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में सबसे पहले निर्यातकों को ब्याज दरों में दो फीसदी की अतिरिक्त छूट देनी चाहिये। इसके तहत सात फीसदी की न्यूनतम सीमा को भी समाप्त कर दिया जाना चाहिये। उनके मुताबिक महा कुछ उत्पाद क्षेत्रों में ड्रा बैक दरों और डीईपीबी दरों में मामूली बढ़ोत्तरी से निर्यात नहीं सुधरेगा। यह भी देखना होगा कि चीन जसे हमार प्रतिस्पर्धी देश आखिर कैसी रणनीति अपना रहे हैं। हाल ही में चीन ने निर्यातकों का रिफंड चार फीसदी बढ़ा दिया है। इसलिए घरलू निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में डीईपीबी दरों को थोड़ा बढ़ाने से काम नहीं चलेगा बल्कि सरकार सभी उत्पादों की डीईपीबी दरों में बढ़ोत्तरी करनी चाहिये। वहीं दूसरी ओर ड्रा बैक दरों को भी बढ़ाने का इंतजाम करना चाहिये। डीईपीबी स्कीम में निर्यातकों को क्रेडिट दी जाती है जिसके तहत वे उसके बराबर आयात शुल्क की अदायगी से बच सकते हैं और कच्चे माल का आयात नि:शुल्क कर सकते हैं। क्रेडिट को खुले बाजार में बेचा भी जा सकता है। वहीं ड्रा बैक के तहत निर्यातकों को सीधे पैसा दिया जाता है। कल घोषित पैकेा के मुताबिक सरकार ने कुछ टेक्सटाइल उत्पादों कॉटन निटेड फैब्रिक, मैन मेड निटेड फैब्रिक, वूलेन निटेड फैब्रिक और कॉटन यार्न के साथ ही कृषि उपकरणों और स्टेनलेस स्टील कटलरी उत्पादों पर भी ड्रा बैक दरं बढ़ाई गई हैं।

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  • Web Title: निराश निर्यातकों की सरकार से लगाई गुहार