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एक दर्चान स्कूलों ने यूपी बोर्ड छोड़ा

यूपी बोर्ड में भगदड़ मच गई है। शहर के बड़े व अच्छे स्कूलों ने पहले ही नाता तोड़ लिया था।ोो बचे थे वे भी भाग रहे हैं। लगभग 6 महीने के भीतर एक र्दान से अधिक स्कूलों ने यूपी बोर्ड की मान्यता सरकार को लौटा दी। इन स्कूलों ने आईसीएसई व सीबीएसई का दामन थामा है। शहर में यूपी बोर्ड की रीढ़ मानेोाने वाले इन स्कूलों के निकलोाने से बोर्ड के पास मानक के अनुसार बने विद्यालय ही नहीं रह गए हैं।ड्ढr यूपी बोर्ड केोिले में लगभग सवा छह सौ इण्टर कॉलेा हैं। इनमें 113 रााकीय व सरकारी वित्त पोषित तथा शेष लगभग 512 प्राइवेट हैं। इसमें भी लगभग साढ़े चार सौ स्कूल धारा े तहत मान्यता पाने वाले हैं। इन विद्यालयों को नियमों को शिथिल कर मान्यता दी गई थी। मानक पूरे करने के लिए इन्हें निश्चित अवधि दी गई थी। लेकिन यह आा तक मानक पूरा नहीं कर पाए। इनमें से सैकड़ों स्कूल आा भी दो-तीन कमरों में चल रहे हैं। इन्हें मान्यता देकर यूपी बोर्ड ने शिक्षा माफिया को पाँवोमाने का मौका दिया। वर्ष 2008 के अंत में बोर्ड नेोिन चार स्कूलों को मान्यता दी है वे भी मानक पर खर नहीं हैं। शिक्षा माफिया की बढ़ती पकड़ तथा अफसरों की रो-रो की फरमाइशों से आािा आकरोिले के अच्छे व साधन सम्पन्न स्कूलों ने यूपी बोर्ड से रिश्ता तोड़ना शुरू कर दिया है। हालाँकि सिटी मॉण्टेसरी स्कूल ने इसकी शुरुआत 80 के दशक में ही कर दी थी। एक-एक कर उसने यूपी बोर्ड से अपनी सभी शाखाएँ हटा लीं। फिर नवयुग रडियंस, एलपीएस तथा रानी लक्ष्मीबाई ौसे कई अच्छे स्कूलों ने साथ छोड़ा। मॉण्ट फोर्ट इण्टर कॉलेा (महानगर ब्वाया) ने भी लगभग तीन महीने पहले यूपी बोर्ड की मान्यता वापस कर दी। माउण्ट कार्मल गर्ल्स इण्टर कॉलेा ने भी यूपी बोर्ड का साथ छोड़कर सीबीएसई का दामन थाम लिया है। एक्ाान माण्टेसरी इण्टर कॉलेा को बीते वर्ष 18 नवम्बर को आईएससी की मान्यता मिली। इसका भी अब यूपी बोर्ड से कोई रिश्ता नहीं रह गया है। बाल गाइड इण्टर कॉलेा, गयासिबान पब्लिक इण्टर कॉलेा, सेंट फ्रांसिस की वृन्दावन शाखा, सेंट एांलिस अमौसी, दिल्ली पब्लिक स्कूलोानकीपुरम, डैबिल स्कूल बंथरा, रानी लक्ष्मीबाई की चिनहट शाखा तथा महारा अग्रसेन इण्टर कॉलेा गोमतीनगर सहित कई अन्य अच्छे कॉलेाों ने सीबीएसई व आईसीएसई की मान्यता ले ली है। लगभग एक र्दान और स्कूलों की मान्यता वापसी की पत्रावली शासन पहुँच चुकी है। एनओसी मिलते ही यह कॉलेा भी यूपी बोर्ड के क्षेत्र से बाहर होोाएँगे। डीआईओएस गणेश कुमार खुद कहते हैं कि अच्छे स्कूल न मिलने की दशा में छोटे विद्यालयों को परीक्षा केन्द्र बनाना पड़ा। उनका दावा है किोिले में इससे अच्छे परीक्षा केन्द्र बनाए ही नहींोा सकते।

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