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जापानः समुद्र में रेडियोधर्मी आयोडीन की मात्रा बढ़ी

जापानः समुद्र में रेडियोधर्मी आयोडीन की मात्रा बढ़ी

जापान में विनाशकारी भूकंप और प्रलयंकारी सुनामी में क्षतिग्रस्त फुकुशिमा परमाणु के पास समुद्र के जल में वैध सीमा से 3355 गुणा ज्यादा रेडियोधर्मी आयोडीन मिली है, जबकि पहले यह मात्रा 1850 गुणा अधिक बताई गई थी। उधर प्रधानमंत्री नाओतो कान ने कहा है कि हालात के बारे में कुछ भी पूर्वानुमान लगा पाना मुमकिन नहीं है।

'बीसीसी डॉट को डॉट यूके' के अनुसार जापान की परमाणु सुरक्षा एजेंसी कहना है कि फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के रिएक्टर संख्या एक का रेडियोधर्मी विकिरण वैध सीमा से 3355 गुणा ज्यादा है। वैसे अधिकारियों का कहना है कि इसके लोगों तक पहुंचने तक आयोडीन का अपकर्ष हो जाएगा।

इस बीच, फुकुशिमा संयंत्र की संचालक टोक्यो इलेक्ट्रिक पॉवर कंपनी-टेप्को के अध्यक्ष मासाताका शिमिझू को उच्च रक्तचाप और चक्कर आने की वजह से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। 11 मार्च की त्रासदी के बाद से शिमिझू को सार्वजनिक तौर पर बहुत कम देखा गया है।

इस बीच, जापान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी के उपमहानिदेशक हाइदेहिको निशियामा के अनुसार, ''आयोडीन-131 का जीवन आठ दिन होता है और जहां क समुद्री जल में इसके होने की बात है, लोगों के पास पहुंचने तक इसका अपकर्ष हो जाएगा।''

चेर्नोबिल आपदा के बाद आयोडीन 131 की वजह से बच्चों में थायरॉयड कैंसर के बहुत ज्यादा मामले सामने आए थे। इस बीच, जापान के प्रधानमंत्री कान ने अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ फुकुशिमा संकट के बारे में बातचीत की है। कान ने कहा है कि उनकी सरकार अत्यधिक सतर्कता बरत रही है, लेकिन हालात के बारे में कुछ भी पूर्वानुमान लगा पाना मुमकिन नहीं है।

परमाणु संयंत्र के कामगार रेडियोधर्मी पानी को समुद्र जल में मिलने से रोकने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। रिएक्टरों की इमारतों के अंदर और बाहर उच्च रेडियोधर्मी विकिरण पाया गया है। संयंत्र की मिट्टी में प्लूटोनियम भी मिला है।

टेप्को और परमाणु सुरक्षा एजेंसी ने कहा है कि रेडियोधर्मी रिसाव का स्रोत अब तक पता नहीं चल सका है। टेप्को पर पारदर्शिता न बरतने और विकिरण के बारे में सही सूचना न देने का आरोप लगाया जा रहा है।

इस बीच, अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य में मामूली मात्रा में रेडियोधर्मी विकिरण पाया गया है। यह विकिरण जापान से पहुंचा है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने न्यूयॉर्क राज्य के स्वास्थ्य विभाग की प्रवक्ता क्लाउडिया हट्टन के हवाले से कहा है, ''अमेरिकी वायुमंडल में जापान से आए रेडियोधर्मी विकिरण की बहुत मामूली मात्रा उपस्थित है।''

उधर, हांगकांग में रेडियोधर्मी धूल-कण पाए गए हैं, जिनके बारे में माना जा रहा है कि ये करीब 3000 किलोमीटर दूर जापान के परमाणु संयंत्र से यहां पहुंचे हैं। वैसे ये रेडियोधर्मी-कण काफी सूक्ष्म हैं और मानव शरीर पर इनका प्रभाव पड़ने में 2500 वर्ष तक का समय लगेगा।

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