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निगरानी जांच की सिफारिश

महालेखाकार ने अधिकारियों द्वारा सरकारी खजाने से अग्रिम लेकर हिसाब नहीं देने के मामले की निगरानी जांच कराने को कहा है। उन्होंने इस बाबत वित्त सचिव को एक पत्र लिखा है। इसमें महालेखाकार ने एसी बिल की राशि लगातार बढ़ने पर कड़ी नाराजगी जतायी है। महालेखाकार के पत्र के बाद इस मामले में गेंद अब सरकार के पाले में है।कार्रवाई की जवाबदेही राज्य सरकार पर केंद्रीत हो गयी है। नियम कहता है कि कोषागारों को एसी बिल का हिसाब लिए बगैर अगले किसी भी बिल का भुगतान नहीं करना है। लेकिन आठ वर्षो से बगैर पिछले एसी बिल का हिसाब दिये राशि निकालने का सिलसिला जारी है। अब राज्य में अग्रिम बकाया की राशि बढ़कर 6500 करोड़ हो गयी है। एजी ने इस स्थिति को काफी संवेदनशील बताया है। सरकार को लिखा है कि यह आपराधिक मामला बनता है। या तो डीडीओ जाली सर्टिफिकेट देकर ट्रेारी से धड़ल्ले से भुगतान ले रहे हैं या ट्रेारी से बिना सर्टिफिकेट दिये धन निकल जा रहा है।ं

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