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कई अफसरों पर सीबीआइ की गाज

े ंद्रीय रिार्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के चंद अफसरों ने वर्दी को दागदार करने की कोशिश की है। इनके द्वारा रिश्वत लेकर सीआरपीएफ में बहाली का धंधा चलाया जा रहा था। इसका खुलासा सीबीआइ की छापामारी से हुई है।ड्ढr पांच मई को सीबीआइ दिल्ली की टीम ने देशव्यापी छापामारी अभियान चलाकर एक बड़े रैकेट का खुलासा किया है। इसमें आइजी, डीआइजी और कमांडेंट स्तर के अफसर भी शामिल हैं। इनके पास से एक करोड़ रुपये नकदी, बहाली के लिए आये उम्मीदवारों से लिये गये पैसे का रिकार्ड, विनियोग से संबंधित कागजात और चल-अचल संपत्ति के कागजात जब्त किये गये हैं। देर रात तक छापामारी जारी थी। घोटाले में शामिल कुछ अफसरों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।ड्ढr मिली जानकारी के अनुसार सीबीआइ ने इस संबंध में बिहार और झारखंड सेक्टर के कुछ बड़े अफसरों सहित निजी व्यक्ितयों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया है। आरोप है कि सीआरपीएफ कांस्टेबल और जेनरल डय़ूटी के विभिन्न पदों पर बहाली के लिए अफसरों द्वारा उम्मीदवारों से बड़े पैमाने पर रिश्वत ली गयी है। इसके लिए एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था, जिनका सीधा संबंध आइजी, डीआइजी और कमांडेंट स्तर के अधिकारियों से है। इनके सहयोग से वैसे उम्मीदवारों का नाम मेधा सूची में शामिल किया जा रहा था, जिन्होंने पैसे दिये हैं। इसी सूचना पर सीबीआइ ने झारखंड, बिहार, उत्तरप्रदेश, हरियाणा और पंजाब के 20 ठिकानों पर एकसाथ छापामारी शुरू की। 10 सीआरपीएफ अफसरों को हिरासत में लिया गया है। टीम ने पटना सीआरपीएफ के आइजी पुष्कर सिंह, मेदिनीनगर के कमांडेंट बीएस सिद्धू, जमशेदपुर के कमांडेंट यादवेंद्र सिंह के आवास में भी छापामारी की, जहां से कई महत्वपूर्ण कागजात जब्त किये गये। इसके अलावा मेदिनीनगर े जीएलए कॉलेज स्थित बेस कैंप और जमशेदपुर के आदित्यपुर स्थित बेस कैंप में भी छापामारी की गयी।ड्ढr गौरतलब है कि इससे पूर्व 23 फरवरी को सीबीआइ ने सीआरपीएफ के एक डीआइजी और हेड कांस्टेबल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इन्हें लखनऊ में बहाली में हुई गड़बड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

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  • Web Title: कई अफसरों पर सीबीआइ की गाज