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3 जुलाई, 2020|4:16|IST

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लीबियाई नगाड़ा

कई दिनों पहले के गुलाल के कारण मौलाना की सफेद दाढ़ी अब भी गुलाबी नजर आ रही थी। एक तगड़ी डकार फेंक कर बोले, ‘भाई मियां, कानी के ब्याह में नौ-सौ नखरे। यह बुढ़ापे का हाजमा और हर घर से गुझिया-पापड़ी। किसी भ्रष्टाचार का पेट तो है नहीं कि अल्लम-गल्लम तक चला ले। बेगम तीन दिन से हींग का चूरन फंका रही हैं और मूंग की दाल पिला रही हैं। हमने भी कहा कि होली भर खूब छकेंगे.. बाद में तो बेगम रूपी सीबीआई को झेलना ही है।’

छोटी उंगली से जरा-सा चूना चाटकर बोले, ‘और सुना आपने। खबरों में खबर रेंगी है कि लीबिया के तानाशाह और लालची राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर उन्हें मुंहमांगी रकम मिल जाए, तो वह देश छोड़ने को तैयार हैं। (और ज्यादा मिल जाए, तो शायद दुनिया भी छोड़ दें)। अमां भाई मियां, इन भरभुखों का पेट है या नगाड़ा। इतना माल ठूंसने पर तो नगाड़ा क्या, पूरा नक्कारखाना ही फट जाए। सच है कि हाथी के मुंह में गन्ना देना आसान है, मुंह से निकालना बहुत मुश्किल है। चूंकि गद्दाफी हैं, सो गद्दे भी डॉलरों से ठुंसे होंगे। या खुदा, इनकी कब्र मिट्टी से नहीं, डॉलरों से पाट देना। हमारे देश में पिछले दिनों में नगाड़ा पेट वाले कई-कई सूरमा हुए हैं गद्दाफी मियां, मगर देश नहीं छोड़ा। अब भी देश की छाती पर लदे हैं। जेल में रहें या बाहर..रहे देश में ही। अब सीबीआई इनके पेटों में सूराख कर-करके अंदर झांक रही है। चीमड़पन की हद हो गई कि राष्ट्रपति कहे कि इतना दो, तो देश छोड़ देंगे। इतना तो मियां मुशर्रफ भी नहीं ले भागे। मुंह का टेस्ट बिगड़ गया। चलो, चाय पीते हैं। पैसे गद्दाफी के नाम डेबिट कर देंगे।’ 

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  • Web Title:लीबियाई नगाड़ा