अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

लालू कहिन, लाठी इचा दी सोर्स ऑफ एनर्जी

देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती की तिथि है 3 दिसंबर। लेकिन पटना में इस मौके पर समारोह का आयोजन हुआ एक महीना एक दिन बाद रविवार को। इसमें पधार केंद्रीय रल मंत्री लालू प्रसाद और उन्होंने नया फंडा दिया- ‘लाठी इज द सोर्स ऑफ एनर्जी एंड पेन क्ष द सोर्स ऑफ नॉलेज।’ लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अगर लालू का यह फंडा चल गया तो माई (मुसलमान और यादव) के बाद कायम (कायस्थ, यादव और मुसलमान) का फॉमरूला भी बन सकता है। इसमें लालू बोले भी, ‘मेरी लाठी और आपकी कलम- दोनों जुड़वा बहनें हैं। हम एक हो जाएं तो दीवार (?) तोड़ सकते हैं।’ अपने चिरपरिचित अंदाज में लालू बोले, ‘कायस्थ लोग दहेा तो कम लेते हैं, लेकिन खाने-पीने के शौकीन हैं। कायस्थों की बारात में महिला-पुरुष सब निकलते है, लेकिन ‘जो कायस्थों की तीन बारात में शामिल होगा, वह अंधा हो जाएगा।’ की कहावत बताना नहीं भूले। सार्वजनिक मंच हो तो नीतीश को नहीं भूलते लालू। उन्होंने सहारा लिया भाजपा सांसद डॉ. सी.पी. ठाकुर के बयान का। लालू ने कहा कि डॉ. ठाकुर का कहना है कि नीतीश को नोबल पुरस्कार मिले। बोले, ‘यह टीटीएम है। मतलब ताबड़तोड़ तेल मालिश। ठाकुर साहब डॉक्टर हैं, सांसद हैं, पद्मश्री भी हैं। नोबल पुरस्कार को गजरा (गाजर) समझ लिया है क्या?’ वैसे, समारोह की अध्यक्षता कर रहे पूर्व महाधिवक्ता शशि अनुग्रह नारायण ने कहा कि लालू प्रसाद कायस्थों के गुरु बनें तो कायस्थ शिष्य बनने को तैयार हैं। यह क्या था, पता नहीं! काटरूनिस्ट पवन की उन पर बनाई जा रही एनिमेशन फिल्म पर भी लालू ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि हम तो मीडिया वालों को बुला-बुला कर बात करते हैं। हम पर काटरून बना दिया कि हमको फोटोग्राफर सब भगा रहा है और हम बाथरूम में जा रहे हैं। वहीं लालू इससे अनभिज्ञ होंगे कि समारोह में आईं डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की पौत्रियां अपने दादा का अपमान नहीं देख सकीं और लालू के आने के पहले ही आहत भाव से चली गईं। डॉ. तारा सिन्हा ने कहा कि ‘हॉल में पहुंचते ही हमें लगने लगा कि इसका आयोजन हमार दादा की स्मृति में नहीं, बल्कि रल मंत्री लालू की स्तुति गाने के लिए किया गया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: लालू कहिन, लाठी इचा दी सोर्स ऑफ एनर्जी