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दूध बेच गुजारा कर रहा है पूर्व स्पीकर मंडल जी का परिवार

देश की आजादी में सर्वस्व न्यौछावर करने वाले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. रामनारायण मंडल के परिवार वाले आज बदहाली की जिन्दगी जी रहे हैं। महज एक गाय उनकी जीविका का सहारा है, जिसका वे दूध बेचते हैं तब मिटती है पेट की भूख। शहर के मधुबनी स्थित मुहल्ले में स्व. मंडल का वह अकेला घर है जो खपरैल का है। यहां कभी रौनक का नजारा हुआ करता था पर आज चारों तरफ वीरानी पसरी हुई है। स्व. मंडल के एक पुत्र थे सच्चिदानंद ऊर्फ दिलो यादव, जिनका निधन हो चुका है। पुत्रवधु गीता देवी हैं जिन्हें गरीबी और बेबसी का मलाल तो है, पर ईमानदारी और निष्ठा के पथ पर चलने वाले ससुर स्व. रामनारायण मंडल पर गर्व भी।ड्ढr ड्ढr गीता देवी बताती हैं कि जब उनके ससुर विधानसभा अध्यक्ष थे तब यहां उदासी नहीं थी। प्रशासन के आला अधिकारी से लेकर नेताओं तक यहां जमघट लगा रहता था, पर आज कोई झांकने वाला नहीं! बकौल गीता देवी, उनके निधन के बाद उनके पुत्र ने नौकरी के लिए हर दरवाजा खटखटाया पर हर तरफ से निराशा ही हाथ लगी। बाद में परिस्थितियों से स्व. मंडल के पोतों को भी समझौता करना पड़ा क्योंकि लालू राज में भी हताशा मिली। गांव की जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर जीने का सहारा भी छीन लिया। वे मानती हैं कि ईमानदारी में कष्ट तो झेलना ही पड़ता है। पोता राजीव और संजीव को अपने दादा की ईमानदारी पर गर्व है। वे कहते हैं कि दादा ने जो संस्कार दिया है वही जीने का सहारा है। वे कहते हैं कि कभी लक्ष्मी नारायण सुधांशु, भोला पासवान शास्र्ी और उनके दादा स्व. मंडल इसी कैम्पस में इकट्ठे नास्ता किया करते थे और देश के विकास की बात करते थे पर आज के नेताओं से तो..। उनके मन के नफरत का भाव चेहर पर उतर आया है और कहते हैं, हमें नहीं चाहिए नौकरी-चाकरी, यूं ही जी लेंगे।

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