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आतंकवाद कोई विचारधारा नहीं

पप्पुओं को नजरंदाज न करंे गत सप्ताह एक लेख पढ़ा ‘शहरी पप्पुओं पर टिकी चुनाव आयोग की नजरं’ बहुत सही दिशा में उठने वाला कदम है ये! इस बार खासकर दिल्ली में चुनाव आयोग के अथक प्रयासों से मतदान में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जिसका कारण कुछ पप्पुओं द्वारा वोटिंग में भाग लेना ही है। इसी बीच मैंने कई पप्पुओं से बात की तो उनके पप्पू बनने का कोई न कोई विशिष्ट कारण था जिसका सीधा संबंध कुशासन से था। एक आकलन के अनुसार, 60 प्रतिशत मतदान होने पर यदि मान लिया जाए कि विजयी पार्टी 60 में से 40 वोट पाकर सरकार बनाने में सफल हो जाती है तो 20 प्रतिशत वोट विपक्षी पार्टियों तथा 40 पप्पू वोट (ाो नहीं डाले गए) मिलकर 60 हो जाते हैं अर्थात अधिकांश जनता सरकार से सहमत नहीं होती ऐसे में सुराज कायम होना कठिन है। अनिल कुमार मिश्र, मयूर विहार, दिल्ली पिनकोड की पुनर्समीक्षा हो भारतीय डाकतार विभाग ने डाक-वितरण की समस्या को सुगम बनाने के लिए कई वर्षो पूर्व सम्पूर्ण देश के राज्यों को एक पिनकोड की व्यवस्था के अनुरूप ढालने का प्रयास किया था। राजधानी दिल्ली को भी आंतरिक रूप में इसी पिनकोड की व्यवस्था में समाहित कर दिया था। जसे-ौसे दिल्ली का रिहायशी क्षेत्र बढ़ता गया, उसी के अनुरूप पिनकोड का नम्बर उस क्षेत्र को दिया जाता रहा। अब जबकि दिल्ली का चहुंमुखी विकास हो रहा है तो भारतीय डाकतार विभाग को दिल्ली की पिनकोड व्यवस्था की पुनर्समीक्षा अवश्य की जानी चाहिए। किशन लाल कर्दम, नई दिल्ली इस्तीफे के साथ सजा भी मिले अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में कोताही करनेवाले मंत्रियों, अधिकारियों के लिए इस्तीफे के साथ-साथ सजा भी तय क्यों न हो। विजय लोढ़ा, रायपुर, छत्तीसगढ़ सभ्यताओं का संघर्ष पिछले रविवार को अखबारों में पढ़ने को मिला कि ‘सभ्यताओं का संघर्ष’ की अवधारणा प्रस्तुत करने वाले एस.पी. हंटिग्टन की 81 वर्ष की अवस्था में 28 दिसम्बर को मृत्यु हो गई। हंटिग्टन ने 1में अपनी अवधारणा को पुस्तकाकार किया था। उनका मानना था कि ‘नई दुनिया में तकरार का मूल स्रेत संस्कृतियों का अंतर रहेगा। लड़ाइयां भिन्न-भिन्न सभ्यताओं से आने वाले राष्ट्र और समूहों में होगी।’ उन्होंने भिन्न सभ्यताओं के रूप में मुख्य रूप से पश्चिमी तथा पूर्वी इस्लामिक सभ्यताओं को आधार बनाया। उनकी यह पुस्तक बाद में अमेरिकी तथा यूरोपीय चिंतकों के बीच विवादास्पद बहस का आधार बनी। हंटिग्टन हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को श्रद्धांजलि। मुकेश बर्णवाल, दिल्ली विश्वविद्यालयं

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