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लोकतंत्र के पर्व में वोटरों ने दिखायी गहरी रुचि

तमाड़ चुनाव में गड़बड़ी की आशंकाएं पूरी तरह निमरूल साबित हुई हैं। योजनाबद्ध तरीके से की गयी तैयारी का ही परिणाम है कि यहां के मतदाताओं ने लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रशासन की तैयारियों को 100 प्रतिशत माक्र्स देना चाहिये। जिस विधानसभा क्षेत्र का सभी बूथ अतिसंवेदनशील और संवेदनशील घोषित हो, वहां शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न हो जाये, ऐसा विश्वास किसी को नहीं था। मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखकर 247 बूथ बनाये गये थे, जिनमें 180 बूथ अतिसंवेदनशील एवं 67 संवेदनशील घोषित किये गये थे। नक्सली संगठनों ने चुनाव बहिष्कार की घोषणा की थी। इस ध्यान में रख चुनाव आयोग के निर्देश पर राज्य निर्वाचन कार्यालय की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये। मतदान केंद्रों पर 222 केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अलावा 83 पेट्रोलिंग पार्टियां तैनात थीं।ड्ढr चुनाव आयोग ने 70 माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किये थे, जो पल-पल की रिपोर्ट ऑब्जर्वर को दे रहे थे। झारखंड में पहली बार माइक्रो ऑब्जर्वर की तैनाती हुई थी। बूथों पर इवीएम तथा पोलिंग पार्टियों को सुरक्षित पहुंचाने और वापस लाने के लिये कई क्लस्टर बनाये गये थे। चुनाव को नियंत्रण करने में यह व्यवस्था भी काफी कारगर सिद्ध हुई। तमाड़ में डीएसपी की हत्या एवं बैंक लूटकांड की घटना से यहां के लोग भयभीत थे। इस चुनाव में 1 लाख 66 हाार 580 मतदाताओं में से 58 प्रतिशत मतदाताओं ने निर्भिक होकर मतदान कर यह सिद्ध कर दिया है कि लोकतंत्र में उनकी आस्था कितनी गहरी है।

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