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37 घंटे में पटना पहुंची राजधानी

राजधानी एक्सप्रस। ऐसी ट्रन जिसकी सवारी सबके नसीब में नहीं है। संपन्न लोग ही कर पाते हैं इस वीआईपी ट्रन की सवारी। कोहर ने राजधानी एक्सप्रस को फिलहाल वीआईपी से मामूली एक्सप्रस बना दिया है। इसके वीआईपी यात्रियों की तो दुर्गति हो गयी है। खासकर बच्चों की हालत काफी खराब रही। बच्चे रास्तेभर भूख-प्यास से बिलबिलाते रहे।ड्ढr तीन जनवरी की रात दिल्ली में राजधानी में सवार हुए यात्री पांच जनवरी की दोपहर पटना पहुंचे।ड्ढr ड्ढr बारह घंटे का सफर 37 घंटे में। अधिक पैसे देने के बाद भी ट्रन में न तो नाश्ता समय पर और न खाना। डिनर हुआ सुबह में तो दोपहर में नाश्ता। हो-हल्ला करने पर कइयों को खाना मिला पर वह भी ठंडा। तीन जनवरी की रात को दिल्ली स्टेशन से शुरू हुई यात्रियों की परशानी पटना यानी अंतिम पड़ाव तक जारी रही। दिल्ली से शनिवार को 2310 राजधानी सात घंटे लेट से चली और 37 घंटे विलंब से सोमवार को दोपहर 1.45 बजे पटना पहुंची। कानपुर के पास एक छोटे स्टेशन पर राजधानी लगभग छह घंटे खड़ी रही। इस दौरान उनकी खूब गत बनी। कोई पूछने वाला नहीं था। बच्चे मम्मी-पापा से खाना मांग रहे थे पर वे कहां सेड्ढr देते खाना।ड्ढr ड्ढr ए थ्री बोगी से परिवार समेत दीनदयाल कुमार पटना जंक्शन पर उतर तो उनकी परशानी चेहर पर साफ झलक रही थी। उन्होंने बताया कि रविवार को दोपहर में नाश्ते में केला, बिस्कुट व चाय मिला और सोमवार को सुबह में पांच बजे डिनर नसीब हुआ। वह भी काफी हो-हल्ला करने पर। रातभर भूख से बुरा हाल रहा। बच्चों व बुजुर्गो की हालत ज्यादा खराब थी। सफाई नहीं होने के कारण शौचालय की हालत बदतर हो गई थी। उन्होंने कहा कि मालगाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के कारण राजधानी एक्सप्रेस रविवार की सुबह सात बजे से दोपहर एक बजे तक कानपुर से पहले के एक स्टेशन पर खड़ी रही। इसके बाद राजधानी बैक हुई और फरु खाबाद होते हुए सोमवार की सुबह चार बजे कानपुर पहुंची। कानपुर से ट्रेन खुली तो यात्रियों को डिनर दिया गया।ड्ढr ड्ढr दिल्ली से लेट खुलने के कारण शनिवार को भी रात एक बजे के बाद डिनर मिला था। उन्होंने कहा कि 13 घंटे की यात्रा 37 घंटे में पूरी हुई। यह यात्रा वे कभी नहीं भूलेंगे। परिवार के साथ ए टू में 46 नंबर बर्थ पर यात्रा कर रहे राजेश कुमार ने भी यही परशानी बताई। हालांकि रास्ते में पैंट्रीकार की ओर से दी गई सेवा से वे अधिक नाराज नहीं थे। उन्होंने यही कहा कि ऐसी परिस्थिति में पैंट्रीकार के अधिकारियों व कर्मचारियों से जितना बन पाया उतना किया। ए-4 के यात्री बीआर जैन की परशानी कम नहीं है। उनका चार जनवरी को ही पटना से गुवाहाटी का रिजव्रेशन था। लेकिन राजधानी के सोमवार को पटना आने से उनका रिजव्रेशन बर्बाद हो गया। रास्ते में खाना-नाश्ता आदि की चर्चा होते ही बिफर पड़े और कहा कि साहब, हंगामा किया तो खाना दिया और वह भी एकदम ठंडा।ं

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