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गुड़िया ने बदला नोनसारी का नजरिया

‘दुनिया रो बदलती है’। यह कहावत पूरी तरह चरितार्थ होती है तालीम के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने वाली नोखा प्रखण्ड के नोनसारी की रहने वाली गुड़िया पर। उसके साहसिक कदम ने तो मानो गांव मे शिक्षा का अलख ही जगा दिया। कल तक जिस गुड़िया के अचानक घर से भाग जाने को लेकर हो रहे कटाक्ष से उसके परिान कटे जा रहे थे, वहीं अब उसके परिानों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।ड्ढr ड्ढr गांव मे उत्साह का माहौल है। उसके कदम अनुकरणीय बन गये हैं। उसके इस कदम का इस कदर प्रभाव पड़ा है कि अब तक शिक्षा को सेकेण्डरी (द्वितीयक) मानने वाले नोनसारी गांव के अशिक्षित और गरीब अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोग पढ़ाई की बात करने लगे हैं। गुड़िया की दादी शहीदन बेगम भी बदलते समाज में मुस्लिम समाज की लड़कियों को शिक्षित करने की हिमायत करती हैं। वह बताती हैं कि मां-बाप को ताला में बंद कर पढ़ाई के लिए गुड़िया के भागने के बाद घर में दो दिनों तक चूल्हा नहीं जला। लोगों के कटाक्ष से घर से निकलना दूभर हो गया था । टेलरिंग का काम करने वाले गांव के जमीर मोहम्मद कहते हैं कि वे जल्द ही अपनी बच्ची को भी वहां पढ़ाने भेजेंगे।ड्ढr ड्ढr वहीं शोभराज राम का कहना है कि गांव की लगभग दर्जन भर बच्चियां अब पढ़ने के लिए जिद करने लगी हैं। उधर आवासीय सेतु पाठयक्रम बालिका केन्द्र में पढ़नेवाली गुड़िया की सहेलियां रखा, संजू, किरण, पूनम कहती हैं कि उसके कदम ने उनमें भीं एक नया जोश भर दिया है। नोखा बीईईओ किरण कुमारी ने पुरस्कार हेतु विभाग से पत्राचार करने की बात कही।

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