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आतंकवाद के खिलाफ जंग में सब एक है: चौहान

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में केन्द्र सरकार के साथ एक जुटता व्यक्त करते हुए मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी कानून 2008 के कुछ प्रावधानों को लेकर आपत्तियों को इस संघर्ष में मतभेद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। चौहान ने यहां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा आतंरिक सुरक्षा के मुद्दे पर आहूत मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में उक्त कानून की धारा 3 4 8 11 ‘1’ एवं ’2’ तथा 16 ‘1’ के प्रावधानों को देश के संवैधानिक ढांचे की भावना के विरूद्ध बताया था। उन्होंने संवाददाताआें से बातचीत में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी किन्तु परन्तु की गुंजाइश नहीं है। हमने प्रधानमंत्री और केन्द्र सरकार को कुछ सुझाव दिए है जिन पर विचार करके कानून में संशोधन किया जाना चाहिए लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम इसका विरोध कर रहे हैं या मतभेद व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री एवं केन्द्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम ने आश्वासन दिया है कि वह आपत्तियों के इन बिन्दुआें पर संदेह मिटाने का पूरा पूरा प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि बैठक में उन्होंने नक्सल प्रभावित रायों की सूची से मध्यप्रदेश को हटाए जाने की आेर भी प्रधानमंत्री का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि मण्डला डिण्डोरी सीधी बालाघाट जिलों में नक्सली सक्रिय हैं लेकिन पुलिस प्रशासन की चौकसी के कारण काफी समय से कोई वारदात नहीं हुई है। इसे कारण बना कर मध्यप्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की सूची से हटा कर केन्द्रीय सहायता रोकने का प्रयास करना ठीक नहीं है। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों में राजनीतिक संकीर्णताआें के आधार पर नियुक्ितयां नहीं होनी चाहिए। बल्कि योग्यता एवं क्षमता पर विचार करके तैनाती की जानी चाहिए।

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