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ह्यूमन ट्रैफिकिंग रोकने में गांव की पढ़ी-लिखी लड़कियों की मदद ली जा सकती है। लड़कियों को प्रशिक्षित कर उनके माध्यम से उन दलालों का पता लगाया जा सकता है, जो लड़कियों को बहला-फुसलाकर या जोर-ाबरदस्ती दूसर शहरों में ले जाते हैं। यह कहना है राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य मंजू हेंब्रम का। वह छह जनवरी को ‘अवैध मानव व्यापार रोकने के कानून के प्रस्तावित संशोधन’ पर होटल कैपिटोल हिल में आयोजित कार्यशाला में बोल रही थीं। कार्यशाला का आयोजन शक्ितवाहिनी, नेशनल नेटवर्क ऑफ लॉयर्स फॉर राइट्स एंड जस्टिस,एफटेक एवं यूनिफेम द्वारा किया गया है।ड्ढr हेंब्रम ने कहा कि झारखंड से सबसे ज्यादा लड़कियों का पलायन होता है। इसे रोकने के लिए रलवे की ओर से भी पहल की जा सकती है। स्टेशनों पर सहायता केंद्र खोले जा सकते हैं। अपर पुलिस महानिदेशक जीएस रथ ने कहा कि मुक्त करायी गयी लड़कियों को बाद में रखने में कठिनाई होती है। इसके अलावा अभियोजन को प्रभावी करने के लिए कानून में बदलाव भी जरूरी है। कार्यशाला में एडीआरएम एमके यादव, डॉ एनके ताह, संजय मिश्रा सहित कई लोगों ने विचार रखे।ड्ढr अधिकारी नदारद, आयोग गंभीर : मंजू हेंब्रम ने कहा कि सभी विभागों के सचिवों को कार्यशाला में उपस्थित रहने के लिए पत्र भेजा गया था। लेकिन रलवे और पुलिस को छोड़कर किसी भी विभाग के पदाधिकारी उपस्थित नहीं हुए। आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है। सभी विभागों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जायेगा।ड्ढr पत्रकार सम्मानित : ह्यूमन ट्रैफिकिंग से संबंधित घटनाओं को संवेदनशीलता के साथ उाागर करने के लिए पत्रकार प्रमोद कुमार सुमन को सम्मानित किया गया।

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