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राजरंग

तमाड़ में का जाने का होगा, बुध के सांझ तक तो पते नय चला। अब जो होगा, कल पता चलिये जायेगा। कुछे घंटा तो बचल है। दस-बारह गो कैंडिडेट के हार्ट की धुकधुकी लगल है। का जानी का होगा, नय होगा। कोई पिक्चरवा साफ-साफ नहीं दिख रहा है। थोड़ा सा डाउट लगल है। खाली कैंडिडेट परशान नय हैं, जेनरल पब्लिक को भी फिकिर है तमाड़ की। जब से भोट हुआ है, लोग अंगुरी में जोड़-घटाव करिये रहा है। तीर-धनुष को एतना भोट मिलेगा, तो नगाड़ा को एतना। कोई कहता है- मशाल तो बुतबुता रहा है, तो कोई कह रहा है कि केला ठीक से पकबे नय किया। अर भाई, पब्लिक को काहे नय होगा फिकिर? इ तो पब्लिक फेस्टिवल कहलइबे करता है। उ भी जिस जगह से स्टेट का चीफ मिनिस्टर इलेक्शन लड़ेंगे, तो उ कोई जेनरल इलेक्शन थोड़े होता है। जिस जगह से चीफ लड़ते हैं, उस जगह का भैल्यू बढ़िये जाता है। भैल्यू बढ़ल जगह होने के कारण पूरा स्टेट का ध्यान लगना जरूरी है कि नय? अब कोई इ गाना गाये कि घड़ी-घड़ी मेरा दिल धड़के, हाय धड़के, क्यूं धड़के . . .? इ मशीन से का निकलेगा, भूत या जिन्न, दिन चढ़ते-चढ़ते सबको पता चल जायेगा। गुरु का भाग्य चमकेगा कि राजा बजायेंगे बाजा. . .।

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