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बस के बिना बेबस लोग

दरवाजे की शान पुरानी कार एमसीडी पार्किंग में कई सालों से पुरानी बदहाल गाड़ियां ठहरी हुई हैं जिनका कोई मालिक बनने को तैयार नहीं। इन दिनों एमसीडी की पार्किंग के साथ-साथ कारों को मेट्रो-पार्किंग भी भाने लगी है। यहां भी कारं लम्बे समय से सुस्ता रही हैं। आज भी कई स्थानों पर पुराने वाहन लोगों के दरवाजे की शोभा बढ़ा रहे हैं। जिससे जगह पर कब्जा हो जाए, कोई अन्य पड़ोसी वहां अपनी गाड़ी खड़ी न कर सके। यदि ऐसे महानुभावों से गाड़ी बेचने के लिए कहें तो सबका अलग-अलग जवाब होता है। ‘काहे! बेच दें भैया! इसी गाड़ी में तो हम दुलहनियां ब्याह कर लाए थे।’ राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली यह कैसा न्याय है? 28 दिसम्बर 2008 को एक सुगर मिल की तरफ से मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया। बड़ौदा हाउस गुरु हरिकिशन पब्लिक स्कूल इंडियागेट से उसमें लाखों रुपए का इनाम दिया गया। मगर मिल पर गन्ना देने वाले किसानों का बकाया रुपया दो-दो, तीन-तीन साल से बाकी है, वह नहीं दिया जा रहा है। यह कैसा न्याय है? जानना चाहते हैं वे किसान। अशोक गुप्ता दाढ़ीवाला, दिल्ली गंभीर मानवीय अपराध राजधानी दिल्ली में पिछले कई वर्षो से दिल्ली के निवासियों को मिलावटी खाद्य पदार्थो के सेवन पर निर्भर होकर ही जीवन-यापन करना पड़ रहा है। मिलावट निरोधक कानून भी है व इसको लागू करने वाला दिल्ली सरकार का खाद्य अपमिश्रण विभाग भी है। विभाग द्वारा एक वर्ष में जितने भी नमूने लिए जाते हैं, उनके परिणाम वर्ष के अंत तक भी नहीं आ पाते हैं। अदालती कार्यवाही में भी कई वर्षो का समय लग जाता है। तब तक सभी प्रकार के भ्रष्ट तौर-तरीकों का इस्तेमाल हो चुका होता है। राजधानी के निवासी मिलावटी खाद्य वस्तुओं का सेवन कर अपंगता, अंधता जसी संगीन बीमारियों के शिकार बन, जीवन से संघर्ष कर रहे हैं। किशन लाल कर्दम, उत्तम नगर, नई दिल्लीं

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