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संथाल परगना में दो बार हार चुके हैं गुरुजी

तमाड़ शिबू सोरन की कभी कर्मभूमि नहीं रही है पर लम्बे राजनीतिक जीवन में दो ऐसे मौके आये जब उन्हें अपनी कर्मभूमि संथाल परगना में भी हार का सामना करना पड़ा था। 10 में सांसद बने श्री सोरन को दुमका में पहली बार 1े लोक सभा चुनाव में तब हार का स्वाद चखना पड़ा था जब कांग्रस के तब के कद्दावर नेता पृथ्वी चन्द्र किस्कू ने उन्हें पराजित कर दिया था। उसके बाद 1और 1े लगातार तीन चुनावों में गुरुजी ने दुमका लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 1में वे भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल मरांडी से पराजित हो गये। दुमका में यह उनकी दूसरी पराजय थी। श्री सोरन को शिकस्त देने वाले श्री मरांडी की 1े मध्यावधि चुनाव में भी विजयश्री मिली पर इस बार उनके विरुद्ध शिबू सोरन के स्थान पर रुपी सोरन ने झामुमो प्रत्याशी के रुप में चुनाव लड़ा था। अपनी खोयी हुई दुमका सीट पर 2002 के उपचुनाव में गृरुजी ने फिर से कब्जा जमाया जब भाजपा प्रत्याशी सोनेलाल हेम्ब्रम को उन्होंने भारी मतों से पराजित कर दिया था। दुमका के सांसद बाबूलाल मरांडी के झारखंड के मुख्यमंत्री बनने के बाद सीट खाली हो जाने के कारण यहां उपचुनाव हुआ था। पुन: 2004 के चुनाव में श्री सोरन यहां से चनाव जीते। 2008 में जब वे झारखंड के मुख्यमंत्री बने तो वे दुमका के सांसद थे। तमाड़ उपचुनाव के बाद इस सीट को वे खाली करने वाले थे। विधान सभा चुनाव में श्री सोरन ने संथाल परगना में केवल एक बार 1में अपना भाग्य आजमाया। उधर तमाड़ के चुनाव परिणाम के बाद दुमका में गुरुजी के आवास पर सन्नाटा पसर गया है। यहां बाहरी कैंपस में झामुमो सुप्रीमो का एक बड़ा सा होर्डिग दीवार के सहार टिका हुआ है। तमाड़ में मुख्यमंत्री जीतते, तो शहर में विजय जुलूस निकलता। पर चुनाव परिणाम ने झामुमो कार्यकर्ताओं को निराश कर दिया है। पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता कहीं नजर नहीं आ रहा है। दूरभाष पर पार्टी के केन्द्रीय सचिव विजय कुमार सिंह ने कहा कि गुरुजी मास लीडर हैं। इस हार से उनकी सेहत पर असर नहीं पड़ेगा, पर पार्टी को इस हार से झटका लगा है। इसकी समीक्षा होगी। झामुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक मुमरू ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि गुरुजी संथाल परगना की किसी सीट से चुनाव लड़ते, तो यह नौबत नहीं आती, पर यूपीए के घटकों के दबाव में उन्हें तमाड़ से चुनाव लड़ना पड़ा। शहर के खिजुरिया मुहल्ले में ही गुरुजी आवास से ठीक सटे जिला झामुमो का कार्यालय सूना पड़ा है। शिबू सोरन के आवास पर तो चार-पांच सुरक्षाकर्मी भी हैं, पर पार्टी कार्यालय में तो एक आदमी नहीं है। गुरुजी का आवास उनके लंबे राजनीतिक जीवन के कई महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव का गवाह रहा है।ं

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