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पाक को शस्त्र विक्रेताओं पर समीक्षा हो

देश के कुछ चोटी के पूर्व राजनयिकों ने पाकिस्तान के असहयोगपूर्ण रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सुझाव दिया है कि भारत पाकिस्तान के साथ किए गए सिंधु जल बंटवारे और परमाणु ठिकानों पर हमला न करने के समझौते समेत तमाम मौजूदा संधियों और करारों की समीक्षा करे। इन कूटनीतिज्ञों द्वारा जारी वक्तव्य में यह भी कहा गया है कि भारत उन देशों और कंपनियों से हथियारों की खरीद कम करने पर विचार कर जो पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति करते हैं। यहां आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में आयोजित एक बैठक के बाद जारी वक्तव्य पर हस्ताक्षर करने वाले दस कूटनीतिज्ञों में चार पूर्व विदेश सचिव हैं। इनमें से एक अरुंधति घोष ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच 10 में जल बंटवार के लिए की गई इंडस वॉटर संधि में विश्व बैंक तीसरा पक्षकार है। इसलिए सरकार इसके सभी पहलुओं पर विचार कर और किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले विश्व बैंक को भी विश्वास में ले। वक्तव्य पर जिन पूर्व राजनयिकों ने हस्ताक्षर किए, उनके नाम हैं- महाराज कृष्ण रसगोत्रा, ए.एन. राम, के. रघुनाथ, ललित मानसिंह, अजरुन असरानी, कंवल सिब्बल, अरुंधति घोष, कुलदीप सहदेव, इशरत अजीज और दिलीप लाहिड़ी। इन कूटनीतिज्ञों के मुताबिक, गत 26 नवंबर को मुंबई पर हमले पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की मदद से किए गए थे। पाकिस्तान सरकारी नीति के हिस्से के तौर पर लगातार आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी को भी वक्तव्य की प्रतियां भेजी गई हैं। इसमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव दिखावटी और ढुलमुल रहा है और भारत को इन खतरों से खुद ही निपटना होगा। राजनयिकों ने सिफारिशें की हैं कि पाकिस्तान के साथ सभी द्विपक्षीय संबंध और बातचीत स्थगित कर दी जाए। सांस्कृतिक, खेल-कूद व अन्य आदान-प्रदान रोके जाएं।

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