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अब बन सकेंगे असिस्टेंट प्रोफेसर

तीन वर्षीय रजिडेन्सी कोर्स कर चुके डाक्टर भी अब मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बन सकेंगे। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेजों की मान्यता बचाने के लिए राज्य सरकार ने यह नया रास्ता निकाला है। शीघ्र ही मंत्रिपरिषद से स्वीकृति लेकर इसे अमली जामा पहनाया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री नन्दकिशोर यादव ने इस फामरूले को स्वीकृति दे दी है। दरअसल छह पुराने मेडिकल कॉलेजों के करीब 100 शिक्षकों को अगले सत्र से चालू होने वाले तीन मेडिकल कॉलेजों में तैनात करने से मामला और गंभीर हो गया है।ड्ढr ड्ढr पटना मेडिकल कॉलेज, दरभंगा मेडिकल कॉलेज, भागलपुर मेडिकल कॉलेज, मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज, गया मेडिकल कॉलेज और पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज में पहले से ही शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई बाधित थी। ऊपर से इन्हीं कॉलेजों से 100 से अधिक शिक्षकों को पावापुरी मेडिकल कॉलेज, बेतिया मेडिकल कॉलेज और मधेपुरा मेडिकल कॉलेज में तैनात कर दिया गया।ड्ढr इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने इन तीनों नये मेडिकल कॉलेजों के निरीक्षण के लिए आवश्यक शिक्षकों के साथ ही न्यूनतम आधारभूत संरचना बहाल करने का निर्देश दिया है। पर सरकार की मजबूरी यह है कि इन नये कॉलेजों के साथ ही छहों पुराने मेडिकल कॉलेज में भी आवश्यक संख्या में शिक्षकों की तैनाती अगले दो महीने के अन्दर करनी है। एमसीआई अगले दो महीने के बाद नये कॉलेजों के साथ ही पुराने सभी छहों मेडिकल कॉलेजों का भी निरीक्षण करगी और एमसीआई के अनुरुप मानकों की जांच करगी।ड्ढr ड्ढr स्वास्थ्य मंत्री श्री यादव ने कहा कि विभाग ने शीघ्र ही एक नया विज्ञापन निकालने का निर्णय किया है। इससे तीन वर्षीय रजिडेन्सी कोर्स कर चुके वैसे डाक्टर जो विषय विशेष परीक्षा में पीजी की पढ़ाई कर चुके हैं, भी मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बन सकेंगे। इससे मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी।

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