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राजंर्रग

भाई जी की फ्रीा कथाभाई जी पेशे से जनर्लिस्ट है। एगो अखबार में काम करते हैं। ताजा भोजन और ठंडा पानी पाने के लिए फ्रीा खरीदे हैं। जब खरीदा तो इसका प्रचार भी हो गया। लगे हाथ भाईजी ने अपने कुछ मित्रों को यह खुशखबरी सुनायी। दोस्तों ने मुबारकवाद देते हुये भोज-भात कराने का प्रस्ताव रख दिया। फिर क्या था, शुरू हो गया भोज में खाने-पीने का सिलसिला। फ्रीा का उद्घाटन हॉट ड्रिंक से हुआ। अभी तक पांच किलो मीट, उतना ही मुर्गा तथा चार-पांच किलो मछली के साथ-साथ हॉट ड्रिंक की पार्टी हो चुकी है। फ्रीा दस हाार में खरीदा और इतना भव्य भोज दे चुके हैं। एक दिन चलते फिरते उनसे मुलाकात हो गयी। देखा भाईजी गमगीन थे। हालचाल पूछने पर जवाब मिला, नहीं बतायेंगे। क्या नहीं बतायेंगे, उनका यह जवाब सुनकर हमारी जिज्ञासा और बढ़ गयी। पूछा, आखिर ऐसी क्या बात है, जो आप नहीं बताना चाहते हैं। बोझिल मन से कहा-नहीं मानियेगा। चलिए बता देते हैं, लेकिन हमारी भी एक शर्त है। इसके बाद आप न पार्टी मांगियेगा और न ही किसी और को बताइयेगा। इसके बाद भाईजी ने बड़ी विस्तार से फ्रीा कथा बतायी। उनकी कथा सुनकर मन तो हंसने का कर रहा था, लेकिन सामने भाईजी नाराज हो जाते, इसलिए धीर से मुंह दबाकर निकल लिये। लेकिन जब भी फ्रीा कथा याद आती है, हंसी अपने आप छूट जाती है।

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