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दलित कुष्ठरोगी को गांव से निकाला

ुष्ठ रोग क्या हुआ गांव वालों ने फेमू को बेघर कर दिया। उसकी दो मासूम बेटियों पर भी तरस नहीं खाई और उसे गांव से बाहर कर दिया। पूर्णिया पूर्व प्रखंड की भोगा पंचायत अन्तर्गत छतिया मुसहरी में रहने वालों को इस बात की खुशी हैं कि उन्हें मुसीबत से मुक्ित मिल गई। फेमू के इंदिरा आवास पर उसके पड़ोसी ने कब्जा कर लिया है।ड्ढr छुआछूत को आधार बनाकर गांव वालों ने उसके साथ ऐसा किया है। फेमू गांव वालों के व्यवहार से दुखी है।ड्ढr ड्ढr फिलहाल उसे खुले आकाश के नीचे अपनी दो मासूम बेटियों पुतुल और सुमन के साथ गांव से दूर हाईस्कूल के मैदान में रहना पड़ रहा है। उसकी दोनों बेटियां भूख से बिलबिला रही हैं। फेमू भीख में मिले चावल को चुनी गयी लकड़ियां जला कर पकाता है और उनकी भूख मिटाने की कोशिश करता है। आंखों में आंसू लिए फेमू का मूक सवाल है कि उसने हर किसी से रहम की भीख मांगी, किसी ने उसकी नहीं सुनी। आखिर उसका कसूर क्या है?

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  • Web Title: दलित कुष्ठरोगी को गांव से निकाला