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लोकसभा चुनावों पर है उमा की नजर

मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में किंगमेकर न बन पाने से साध्वी उमा भारती के तेवर ढीले नहीं पड़े हैं। अब उनका पूरा ध्यान भारतीय जनता पार्टी के बजाए अपने दल भारतीय जनशक्ति की ताकत बढ़ाने पर केंन्द्रित हो गया है। भारती की पार्टी को विधानसभा के चुनाव में सिर्फ चार सीटें ही मिल पाई हैं। उनका मानना है कि राज्य में पुन: भाजपा की सरकार ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी करने के कारण आई है। चुनाव परिणामों के बाद से ही वे प्रदेश भर में घूमकर चुनाव में हुई कथित धांधली की जानकारी जुटा रही हैं। वे कहतीं हैं कि इस चुनाव में लोकतंत्र के साथ मजाक किया गया है। टीकमगढ़ और पृथ्वीपुर में हुई धांधली के साक्ष्य राज्यपाल बलराम जाखड़ को सौंपे जा चुके हैं। साध्वी शिकायतों की जांच सीबीआई से कराना चाहती हैं। उन्होंने जाखड़ को पंद्रह दिन का समय भी कार्रवाई करने के लिए दिया है। न्यायालय का रास्ता भी उन्होंने खोल रखा है। साध्वी अपनी ताकत बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय क्षत्रपों से भी संपर्क बनाए हुए हैं। शुक्रवार को उनके साथ लोक जनशक्ति पार्टी के उपाध्यक्ष फूल सिंह बरैया भी थे और बालाघाट के कंकर मुंजार भी। गोंडवाना पार्टी के नेता मनमोहन शाह बट्टी कतिपय कारणों से राज्यपाल से मिलने वाले प्रतिनिधि मंडल में शामिल नहीं हो पाए। साध्वी का यह कदम जाहिर करता है कि विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद उन्होंने अपनी रणनीति में कुछ बदलाव किया है। वे क्षेत्रीय क्षत्रपों को एक मंच पर लाने की कोशिश में लगी हुई हैं। साध्वी ने कहा कि उनके पास जनसमर्थन तो है लेकिन चुनाव के लिए जिस प्रबंधन की जरूरत है,वह नहीं है। वे पार्टी के चुनाव प्रबंधन को ठीक करना चाहती हैं। उनके निशाने पर अब भाजपा नहीं राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं। उन्होंने कहा कि कौवे की चोंच में अंगूर आ गया है,इस कारण वह निरंकुश हो गया है। साध्वी आज पत्रकारों से चर्चा में भैरो सिंह शेखावत के विवाद पर बोलने से कन्नी काट गईं। उन्होंने कहा कि भाजपा में रूठने-मनाने का खेल चलता रहता है। दो-तीन बाद देखिए क्या होता है। उधर एस्सार समूह की सिंगरौली में प्रस्तावित बिजली परियोजना के विरोध राजनीतिक दल भी चुपके से शामिल होने लगे हैं। कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुरश पचौरी और जनशक्ति के नेता प्रह्लाद पटेल सिंगरौली में डेरा डाले हुए हैं। साध्वी उमा भारती सही वक्त का इंतजार कर रही हैं। साध्वी की कोशिश इस मामले में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को कटघर में खड़ा करने की है। सिंगुर में भाजपा नेता जब ममता बनर्जी के साथ बैठने जा सकते हैं तो सिंगरौली में राजनाथ सिंह परियोजना का विरोध करने क्यों नहीं आते,साध्वी ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए यह सवाल किया। उन्होंने कहा कि वे विकास की विरोधी नहीं हैं। मध्यप्रदेश में जमीन अधिग्रहण का विकास नीति में कोई योगदान नहीं रहा। साध्वी मानती हैं कि सिंगरौली में तनाव की स्थिति संवादहीनता के कारण निर्मित हुई है। भारती ने अपने विधायक दल के नेता लक्ष्मण तिवारी को वहां भेजा है। जनशक्ति पार्टी के दूसर नेता प्रह्लाद पटेल भी सिंगरौली में ही हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सुरश पचौरी ने भी आज परियोजना से प्रभावित किसानों से मुलाकात की है। सिंगरौली में अब तक अपने हक की लड़ाई प्रभावित किसान खुद लड़ रहे हैं। लेकिन अब धीर-धीर ग्राम बंधौनी राजनीति का अखाड़ा बनाता जा रहा है। यद्यपि साध्वी उमा भारती,ममता बनर्जी की तरह आंदोलन की कमान सीधे अपने हाथ में लेने से इंकार कर रही हैं,लेकिन लगता है कि देर-सबेर वे खुद प्रभावित गांवों में जाएंगी। दूसरी ओर जिला कलेक्टर विवेक पोरवाल यह मानने को तैयार नहीं हैं कि विरोध स्थानीय लोग कर रहे हैं। वे कहते हैं कि कुछ युवकों को शराब पिलाकर आंदोलन के लिए उकसाया गया है।

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