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चहुंओर फैली तिलकुट की सोंधी महक

तिलकुट निर्माण में गया की एक अलग पहचान है और इन दिनों यहां चहुंओर इसकी सोंधी महक फैली हुई है। यहां के निर्मित तिलकुट देश के विभिन्न प्रदेशों के अलावा विदेशों में भी भेजा जाता है। विदेशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों के लिए उनके परिजन गया की तिलकुट भेजते हैं। शहर के रमना रोड वर्षो से तिलकुट निर्माण के लिए प्रसि रहा है। आज भी यहां दर्जनभर से अधिक तिलकुट की दुकानें हैं। इसी तरह शहर के नई गोदाम, पुरानी गोदाम, स्टेशन रोड, टिकारी रोड में भी तिलकुट की नामी कई दुकानें हैं। जहां से लोग तिलकुट खरीदते हैं।ड्ढr ड्ढr इसी तरह विष्णुपद मंदिर क्षेत्र (अंदर गया) स्थित सूर्यकुंड के समीप एक तिलकुट दुकान है जो वर्षो से संचालित है। देश-विदेश के यहां आने वाले पिंडदानी इस दुकान से तिलकुट खरीद कर जाते हैं। मांग के अनुसार वे तिलकुट उपलब्ध कराने में असमर्थ हैं। छोटू साव एवं कृष्णा प्रसाद ने बताया कि यह दुकान वर्षो से संचालित है। यहां आने वाले तीर्थयात्री सहित शहर के लोग भी यहां से तिलकुट खरीदने आते हैं। तिलकुट व्यापार से जुड़े लोग दिन-रात तिलकुट निर्माण में लगे हैं। गया के निर्मित तिलकुट देश के विभिन्न प्रदेशों के अलावे कनाडा, हांगकांग, अमेरिका, सउदी अरब, नेपाल, बंगलादेश, जर्मनी इत्यादि देशों में भी अपनी महक बिखेर रही है। तिल के दाम में वृ िहो जाने से तिलकुट का दाम एक सौ रुपए किलो हो गया है। दुकानदारों ने बताया कि तिल 86 रुपए प्रतिकिलो उपलब्ध हो रहा है। फलत: एक सौ रुपए किलो तिलकुट बेचना पड़ रहा है। इधर, मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र का डंगरा बाजार इन दिनों गुड़ की सोंधी तिलकुट की धमक से महक रहा है।ं

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