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कुलपति को कैसे मिला छठा वेतनमान जांच शुरू

प्रथम दृष्टया वित्त विभाग की लापरवाहीड्ढr लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एएस बरार को छठा वेतनमान दिए जाने के मामले की जाँच शुरू हो गई है। कुलपति की बगैर अनुमति के उनके खाते में छठे वेतनमान के मुताबिक बढ़ा वेतन भेजने में वित्त विभाग की ही लापरवाही सामने आ रही है। लविवि प्रतिकुलपति प्रो. यूएन द्विवेदी की अध्यक्षता में बनी कमेटी इस मामले की पड़ताल कर रही है। इसके लिए दस्तावेज पलटे जा रहे हैं। इधर लविवि कुलपति प्रो. एएस बरार कहते हैं कि नौ लाख रुपए का उन पर कोई बकाया नहीं है। उन्होंने विवि से नियमानुसार ही वेतन लिया है। जो लोग यह कह रहे हैं वह सिर्फ लविवि की छवि धूमिल करना चाहते हैं। लखनऊ विवि में इस समय बेहतर शैक्षिक माहौल है कुछ लोग साजिश कर उसे बिगाड़ना चाहते हैं। इधर जब कुलपति प्रो. एएस बरार को बिना अनुमति के बढ़ा वेतन दिए जाने के मामले पर वित्त नियंत्रक जे प्रसाद से पूछताछ की गई तो उन्होंने कहा कि कुलपति प्रो. बरार को एकाउंट पेई चेक दिया गया था। जो बढ़े वेतनमान के मुताबिक था। जिसे पहले खाते में जमा कर दिया गया और कुलपति ने खुद जब गड़बड़ी पकड़ी तो बढ़ी धनराशि की रकम चेक के माध्यम से वापस कर दी।ड्ढr

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