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आनंद के साथ की 17-17 घंटे प्रैक्िटस: सूर्यशेखर गांगुली

पाश्र्वनाथ शतरां चैंपियनशिप का उद्घाटन समारोह। सूर्यशेखर गांगुली एक साथ दस बच्चों के साथ शतरां खेलने में लगे हैं। वहीं पास में उनकी मां आरती गांगुली बैठी हैं। लगातार छह बार चैंपियन बने सूर्यशेखर से अभी बात करना मुमकिन नहीं था इसलिए हमने कुछ देर उनकी मां से ही बात की। सूर्यशेखर के पिता पंका गांगुली एस्ट्रोलॉजर हैं। अभी भी कोलकाता में वह एक दुकान में यही काम करते हैं। गांगुली की मां बताती हैं, ‘जिस दिन इसका जन्म हुआ था उसी दिन पिता ने जन्मकुंडली देख कर बता दिया था कि यह जिस भी फील्ड में जाएगा नाम रोशन करगा।’ वाकई शतरां के खेल में लगातार छह बार राष्ट्रीय चैंपियन बनना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। लेकिन सूर्यशेखर खुद ऐसा नहीं मानते हैं। पांच साल की छोटी सी उम्र में शतरां खेलना शुरू करने वाले गांगुली ने कहा, ‘शतरां में राष्ट्रीय चैंपियन बनना ही सबकुछ नहीं है। इसके आगे भी बहुत कुछ है। अब मुझे और आगे के बार में सोचना होगा और कुछ बड़े टूर्नामेंटों में हिस्सा लेना होगा।’ पाश्र्वनाथ शतरां के बाद गांगुली दिल्ली से ही सीधे जिब्राल्टर के लिए रवाना हो जाएंगे। इस टूर्नामेंट में खेलने के बाद वे कुछ माह सिर्फ और सिर्फ प्रैक्िटस पर ध्यान देंगे और भविष्य की योजना बनाएंगे। संभवत: अब वे राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी हिस्सा न लें। मां कहती हैं, ‘हमने शुरू में काफी स्ट्रगल किया। स्पांसर वगैरह कुछ नहीं थे। करा ले-लेकर इसे शतरां खिलाया। आज भी कोलकाता में शतरां खिलाड़ियों को स्पांसर नहीं मिलते।’ व्लादिमिर क्रैमनिक के साथ विश्व चैंपियनशिप मैच की तैयारियों के लिए सूर्यशेखर भी आनंद की टीम में थे। आनंद उस विश्व चैंपियनशिप मैच में क्रैमनिक को शिकस्त दे शतरां के निर्विवाद चैंपियन बन गए थे। आनंद की इस सफलता में गांगुली की मेहनत को भी भुलाया नहीं जा सकता। गांगुली कहते हैं, ‘हम 17-17 घंटे तक आनंद के साथ प्रैक्िटस किया करते थे।’ इतना ही नहीं चैंपियनशिप से पहले जब आनंद भारत में थे तब भी गांगुली एक माह के लिए चेन्नई में थे। पिछले 8 साल से गांगुली विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद के प्रैक्िटस पार्टनर हैं।

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  • Web Title: आनंद के साथ की 17-17 घंटे प्रैक्िटस: गांगुली