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पूरब से पश्चिम नहीं पहुँच पाए छोटे दल

पश्चिम यूपी की चुनावी लड़ाई में छोटे राजनीतिक दलों की भूमिका सिमट कर रह गई है। यहाँ राष्ट्रीय व क्षेत्रीय दल आमने-सामने हैं। पहले के तीन चरणों के चुनाव में छोटे दलों ने अपनी भूमिका वोट काटने के रूप में खासी दर्ज की, लेकिन जाट बेल्ट में उनका असर कम होता दिख रहा है।ड्ढr छोटे दलों ने अपनी अहमियत बनाए रखने के लिए चुनाव से एन पहले अलग-अलग मंच भी बनाए थे। मसलन-अधिकार मंच और परिवर्तन मंच। राजनीति के पुराने धुरंधरों को दाँव देने के लिए सोने लाल पटेल का अपना दल, ओम प्रकाश राजभर की भारतीय समाज पार्टी, डॉ. मसूद की नेशनल लोक हिन्द पार्टी, राजाराम पाल की राष्ट्रीय सवरेदय क्रांति पार्टी, आरके चौधरी की राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी, वंचित जमात पार्टी और डॉ. अयूब की पीस पार्टी उम्मीदवार उतार कर बड़े दलों के उम्मीदवारों के लिए फिक्र पैदा की।ड्ढr अपना दल ने फतेहपुर, फूलपुर, इलाहाबाद, भदोही, श्रावस्ती, प्रतापगढ़ व अकबरपुर में बाकी दलों के उम्मीदवारों को चिंता में रखा। मोहनलालगंज सीट से राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी के अध्यक्ष आरके चौधरी को कांग्रेस ने समर्थन दिया तो अकबरपुर में राष्ट्रीय सवरेदय क्रांति पार्टी के अध्यक्ष राजाराम पाल कांग्रेस के टिकट पर लड़े। लेकिन जसे-ौसे चुनाव पश्चिम उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ा इन दलों की उपस्थिति सिमटने लगी है। सात मई को चौथे चरण के चुनाव में ये छोटे दल नेपथ्य में ही रहेंगे। वहाँ मुकाबला राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के बीच ही होगा।

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