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पाक मीडिया : बात घुमाने की अदा में महारत

आखिरकार भारत ने पाकिस्तान को सबूत लिखित रूप से पेश कर दिए। साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साफ-साफ बयान कि पाकिस्तान की भारत के प्रति विदेश नीति आतंकवाद के सहारे पर कायम है और मुंबई हमले में पाकिस्तान की एजेंसियों का हाथ था, पर तीव्र प्रतिक्रिया हुई है। ‘डॉन’ ने अपने सम्पादकीय में इशारा किया है कि यह बयान, क्या आगामी चुनाव को देखते हुए दिया गया है। पत्र आगे कहता है, लगता है कि हमारा पड़ोसी देश, इस समस्या के हल की बजाय पाकिस्तान को दुनिया में बदनाम करना चाहता है और दुनिया को या शायद पश्चिम को यह बताना चाहता है कि इस क्षेत्र में हम ही बड़े हैं। पत्र आगे कहता है कि एक तरफ भारत हमें आतंकवादियों के खिलाफ कार्य करने के लिए कह रहा है दूसरी ओर हमें ही आतंकवादियों के साथ कह रहा है जो आपस में मेल नहीं खाते। ‘फ्रंटियर पोस्ट’ और ‘ दि न्यूज’ ने भी इसी तरह की प्रतिक्रियाएं दी हैं। ‘दि न्यूज’ के मुताबिक भारत ने पाकिस्तान पर जबर्दस्त अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमेटिक दबाव बना दिया है इस पर अमेरिका के असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट रिचर्ड बाउचर ने फतवा ही दे डाला कि पाकिस्तान मुंबई के दोषियों को सजा दे। पत्र आगे कहता है कि पाकिस्तान को सोच-समझ कर आगे कदम उठाना होगा। पर जबकि पकड़े हुए आतंकवादी के पिता ने और दूसरों ने कसाब को पाकिस्तान का मान लिया है यह बात पाकिस्तान सरकार को गौर करनी चाहिए। पत्र आगे कहता है कि दोनों देश अपनी पहली जगह से एक इंच भी हिलने को तैयार नहीं, जिससे कुछ बात नहीं बन रही। दोनों देशों को फिर गौर करना चाहिए। भारत को पाकिस्तान पर दबाव कम करना चाहिए ताकि वह अपनी ओर से आगे के कदम उठाए। पाकिस्तान को भारत को यह भी दिखाना चाहिए कि वह असल में आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने को तैयार है। और अमेरिका और चीन को भी मदद करनी चाहिए। पाकिस्तान में अपनी ही बात से पलट जाना पुरानी प्रथा है। हमले के फौरन बाद कहा गया कि आईएसआई चीफ भारत आएंगे और कुछ ही घंटों में दूसरा बयान कि आईएसआई का कोई दूसरा आफिसर आएगा। अब अगर कसाब का ही मामला लिया जाए, दिसम्बर में पाकिस्तान हाई कमिश्नर ने कहा कि कसाब हमारा नागरिक ही नहीं। और बाद में सरकार ने यह भी कहा कि अगर वह पाकिस्तानी नागरिक साबित हुआ तो हम उसे कानूनी सहायता प्रदान करंगे नहीं तो नहीं। 31 दिसम्बर 2008 को पूर्व नेशनल सिक्योरिटी एडवाक्षर, जनरल (रिटायर्ड) दुर्रानी ने कहा कि कसाब हो सकता है पाकिस्तानी हो। (इसी बात के हराने में प्रधानमंत्री गिलानी ने 7 जनवरी को उन्हें नौकरी से निकाल दिया।) उसी दिन पाकिस्तान की सूचना मंत्री शौरी रहमान ने सरकारी तौर पर माना कि कसाब पाकिस्तानी है। दुर्रानी का मामला, जसा मीडिया कह रहा है कि, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री के बीच में बढ़ती दूरी का प्रतीक माना जा रहा है। असल में पुराने तरीके के मुताबिक प्रधानमंत्री की अपनी ताकत ही नहीं थी और इसी चलन के मुताबिक गिलानी हमेशा हाशिए पर खड़े लगते रहे। अब लगता है उन्होंने अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी है। पिछले दिनों उन्होंने प्रिंसिपल सेक्रेटरी शिराज शमसुद्दीन के साथ-साथ कई बड़ी हस्तियों को भी अलग किया था। ‘डॉन’ के मुताबिक, दुर्रानी के बार में उन्होंने कहा कि ‘मैंने उन्हें डिसमिस किया है। दुर्रानी ने मुझे और सार देश को शर्मिदा किया है।’ जहां तक भारत की दी हुई नई सूची के मुताबिक जिन 40 आतंकवादियों का जिक्र है उसे भारत के हवाले करने की कोई आशा नहीं है। दाउद इब्राहिम और दूसर, मुंबई 1ब्लास्ट के आरोपियों का सवाल है, पाकिस्तान उनके वहां होने से इनकार कर रहा है। इसी तरह सिख आतंकवादी जो वहां छुपे हुए हैं, से भी साफ इनकार। मौलाना महमूद अजहर, जिसने भारतीय विमान अगवा कर भारत की जेल से आजादी ले ली थी को भी भारत को नहीं दिया जा सकता, क्यों उसका कुछ अता-पता ही नहीं। ‘दि न्यूज’ ने इन सूचियों को खारिा करते हुए कहा कि राजनीतिक चाल है इसका मुंबई हमलों से कुछ लेना-देना ही नहीं। भारत को आशा है कि क्योंकि कई अमेरिकी भी मुंबई में मार गए थे इसलिए शायद अमेरिका इन्हें पूछताछ के लिए बुलवा ले। इसे भी खारिा करते हुए ‘दि न्यूज’ ने कहा मुशर्रफ ने पाकिस्तान को अमेरिका का उपनिवेश बना कर रख दिया था। इसके चलते कई लोग अमेरिका की जेलों में बंद हैं। अगर भारत यह समझता है कि वह भी ऐसा करवा पाएगा तो यह उसकी भूल होगी। ‘डॉन’ के मुताबिक आईएसआई के चीफ जनरल शुज्जा पाशा ने एक जर्मन समाचार पत्र से कहा कि वह राष्ट्रपति से आर्डर लेता है। आतंकवाद ही हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है और अगर सरकार चाहेगी, मैं भारत भी जा सकता हूँ और छानबीन में मदद कर सकता हूं। ‘डॉन’ ने इसे उचित कहा।ं

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