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धरा रह गया धन तो कैसे हो विकास

सरकारी विभाग विकास कार्यो को लेकर कितने गंभीर हैं, इसका पता वित्त विभाग के ता आँकड़ों से चलता है। चालू वित्तीय वर्ष 2008-0े नौ महीने से यादा बीत चुके हैं लेकिन यादातर सरकारी विभाग विकास के लिए आवंटित धनराशि का मामूली हिस्सा भी नहीं खर्च कर पाए हैं।ड्ढr इस मामले में माध्यमिक शिक्षा, पंचायतीराज आयुव्रेद-यूनानी चिकित्सा और होम्योपैथिक चिकित्सा विभाग सबसे फिसड्डी साबित हो रहे हैं। वहीं समाज कल्याण और ग्राम्य विकास विभाग में स्थिति बेहतर नजर आ रही है। वित्त विभाग के ये आँकड़े 31 दिसम्बर 08 तक के हैं। बदरंग तस्वीर ंविभाग बाट खर्च प्रतिशत ंविभाग बाट खर्च प्रतिशतड्ढr (करोड़ रु)(करोड़ रु) माध्यमिक शिक्षा 1371पंचायती राा 130214.5ड्ढr कृषि 1 33ड्ढr आयुव्रेद औरड्ढr यूनानी चिकित्सा 27.73 13.81ड्ढr होम्योपैथिक चिकित्सा 18.662.3512.5प्राथमिक शिक्षा 2213103853ड्ढr उच्च शिक्षा 13552 38.51ड्ढr एलोपैथी चिकित्सा 725312 43ड्ढr चिकित्सा शिक्षा औरड्ढr प्रशिक्षण 5862050ड्ढr परिवार कल्याण 83357168ड्ढr विकलांग और पिछड़ाड्ढr वर्ग कल्याण 757 40053ड्ढr अनूसूचितोाति कल्याण 1047 0 87.85ड्ढr अनूसूचितोातिड्ढr (विशेष घटक योना)76073 66ड्ढr ग्राम्य विकास 1677 1242 74 ड्ढr (करोड़ रु)(करोड़ रु)ं

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