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सरदर्दी बने प्रीपेड मोबाइल नंबर

मोबाइल फोन के प्री-पेड कनेक्शनों ने हाारों मोबाइल यूजर्स की जिंदगी में अनजान-अज्ञात लोगों की दस्तक बढ़ा दी है। इन निरीह-असहाय यूजर्स के पास निरंतर एसएमएस और फोन आते रहे। दरअसल हो यह रहा है बहुत सार लोग किसी कंपनी का एक निश्चित राशि देकर प्री-पेड फोन कनेक्शन ले लेते हैं। वे उस राशि का टाइम का इस्तेमाल करने के बाद फिर कोई और नम्बर ले लेते हैं। टेलीकॉम सेक्टर के नियामक की सलाह के विपरीत मोबाइल फोन कंपनियां उस उपयरुक्त नम्बर को दो-तीन हफ्ते के बाद ही किसी नए ग्राहक को दे देती हैं। चूंकि जिसके पास पुराना नम्बर होता है वह अपने सभी मित्रों-संबंधियों को अपने पुराने नम्बर के खत्म होने और नए नम्बर के मिलने की जानकारी देता नहीं है, इसके चलते नए ग्राहक के पास पुराने यूजर के फोन भी आते रहते हैं। सूत्रों का कहना है कि ट्राई ने मोबाइल कंपनियों को सलाह दी थी कि वे अपने प्री पेड नम्बरों को कटने के छह महीने तक किसी को आवंटित नहीं करं। लेकिन इस सलाह की अनदेखी हो रही है। सभी मोबाइल कंपनियां अपने ग्राहकों की संख्या को बढ़ाने के लिए तमाम नियमों की अवेहलना कर रही हैं। सूत्र कह रहे हैं कि प्री-पेड फोन कनेक्शन को कुछ समय के भीतर ही कटवाने के कारण जो समस्या बहुत सार लोगों के सामने आ रही है, उससे आंशिक निजात नम्बर पोर्टबिलिटी व्यवस्था के लागू होने के बाद ही दूर हो पाएगी। आंशिक इसलिए क्योंकि यह पहले मेट्रो शहरों में लागू होगी और फिर दूसर शहरों के मोबाइल ग्राहकों को इससे लाभ होगा।

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