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राज्यकर्मियों की हड़ताल: दोनों पक्षों को न्योते का इंतजार

सूबे में कर्मचारियों की हड़ताल की गाड़ी ‘पहले आप-पहले आप’ में फंसी हुई है। कर्मचारी संगठन वार्ता के लिए सरकार की पहल का इंतजार कर रहे हैं और सरकार का कहना है कि हड़ताल पर कर्मचारी गए हैं लिहाजा वे अपनी बात कहने के लिए आएं। रविवार को हालांकि सरकारी कार्यालयों में अवकाश का दिन था लेकिन दोनों पक्षों ने बातचीत की तैयारी पूरी रखी थी। लेकिन पहला कदम कौन उठाये, यही मसला बना रहा।ड्ढr उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने तो यहां तक कहा कि सरकार की ओर से वार्ता का द्वार खुला है। उन्होंने कर्मचारी संगठनों से अपील की कि बिहार के व्यापक हित में वे काम पर वापस लौटें। उनकी समस्याओं को लेकर सरकार उनसे बात करने को हमेशा तैयार है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की पहले की घोषणा से ही 5 हाार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। लिहाजा वह राज्य के विकास को रोक कर कोई कदम नहीं उठा सकती है। दूसरी तरफ बिहार सचिवालय सेवा संघ के महासचिव अनिल कुमार सिंह ने कहा कि यदि सरकार किसी ठोस प्रस्ताव को लेकर वार्ता के लिए बुलाएगी तो कर्मचारी संगठन जरूर बातचीत करंगे और साथ ही प्रस्ताव पर भी विचार करंगे। उन्होंने कहा कि हड़ताल के पांचवे दिन भी सरकार ने बातचीत के लिए कोई पहल नहीं की। इधर वित्त विभाग के एक आला अधिकारी ने बताया कि सरकार को जो भी कहना था, वह कह चुकी है। कर्मचारी संगठनों के साथ कई बार की बातचीत में भी सरकार ने अपना पक्ष रख दिया है। यदि कर्मचारियों को इससे आगे कुछ कहना है तो उन्हें आकर सरकार के समक्ष कहना चाहिए। सरकार उनके साथ बातचीत के लिए हमेशा तैयार है।

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