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सिर्फ दो हचाार पगार, नहीं ढोएंगे नरगा का बोझ

महा 2 हाार रुपए पगार, उसपर भारी भरकम नरगा का बोझ। वह भी पगार छह माह से बंद। बात-बात पर कांट्रेक्ट खत्म करने की चिठ्ठी। पंचायत रोगार सेवकों का धर्य अब जवाब दे चुका है। रविवार को मनोरांन भवन में जिले के 181 रोगार सेवकों की बैठक हुई जिसमें कहा गया कि अब बहुत हुआ, अब उठो, जागो और हुंकार भरो। उन्होंने 15 जनवरी से नरगा का चक्का जाम करने का ऐलान किया। उस दिन से सूबे के सभी रोगार सेवक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।ड्ढr 14 जनवरी को मशाल जुलूस और जिला समाहरणालय के सामने प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक के बाद रोगार सेवकों ने मीडियाकर्मियों के समक्ष अपनी पीड़ा बयां की। वे आपे से बाहर थे। उन्होंने कहा कि राज्यस्तरीय परीक्षा पास कर 2007 के 15 अगस्त से उन्होंने जब नौकरी शुरू की तो पता नहीं था कि ऐसी दुर्दशा झेलनी होगी। 17 महीने से गांवों में भारी कठिनाइयों के बीच काम करते हुए नरगा को क्रियान्वित कर रहे हैं। लेकिन हमारी स्थिति देखिए। हम मजदूरों को रोाना 8पए देते हैं लेकिन हमको मिलता है मात्र 66 रुपए। हम उनको जॉब कार्ड पांच साल के लिए देते हैं लेकिन हमार जॉब का कांट्रेक्ट है मात्र 2 साल का। ग्रामीण विकास विभाग का प्रावधान है महीना में 2200 मानव दिसव का सृजन करने पर रोजगार सेवक को एक हाार प्रोत्साहन भत्ता मिलेगा जो आजतक नहीं मिला। जबकि दूसर जिलों में यह मिल रहा है। हम गांव-गांव में जाते हैं। महीना में सात- आठ बार जिला मुख्यालय में बुलाया जाता है लेकिन टीए-डीए के नाम पर एक चवन्नी नहीं मिलती। एग्रीमेंट में टीए-डीए देने की बात है। पंचायत रोगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष विपिन बिहारी और प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव सिंह ने कहा कि रोगार सेवकों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है। संघ के दूसर पदधारक आदित्य कुमार, मिहिर कुमार, निशिकांत झा, हलधर कुमार,धीरा कुमार, गौतम कुमार,परमानंद झा, श्रवण कुमार कहते हैं कि खेत खाए गदहा और मार खाए जोलहा वाला हाल है हमारा। नरगा को लागू करने की जिम्मेदारी सीओ से लेकर, पीओ, जेई, एई और डीडीसी तक की है लेकिन इसकी विफलता का ठीकरा हमार सिर पर फोड़ा जाता है। 76 रोगार सेवकों पर कार्रवाई चल रही है। दो की सेवा समाप्त की जा चुकी है। हमको टार्चर किया जा रहा है।

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