DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

थाने में सत्यनारायण की कथा

थाने में अभियुक्तों की गिड़गिडाहट और पुलिस की कड़क आवाज की जगह शंख की ध्वनि, हवन से उठते धुएं और मंत्रोच्चार सुनाई पड़े तो यह किसी ताज्जुब से कम नहीं। रविवार की सुबह स्टेशन पर खड़े यात्री यह नजारा देखकर भौचक हो गये। रल थाने में सत्यनारायण की कथा चल रही थी। वह भी घर-परिवार की शांति के लिए नहीं थाना क्षेत्र में विधि व्यवस्था कायम रखने और जवानों की सलामती के लिए। इसे भगवान में अटूट विश्वास कहें या श्रद्धा आरा रल थानाध्यक्ष विनोद कुमार प्रत्येक पूर्णमासी को थाने में पूजा व हवन कराते हैं। पूर्णमासी के दिन पंडित जी सुबह आ जाते हैं और पूजा की तैयारी शुरू हो जाती है। चार-पांच जवान पूजा पर बैठते हैं वहीं पूजा के दौरान भगवान से इस बात की प्रार्थना की जाती है कि उनके थाना क्षेत्र में विधि व्यवस्था बनी रहे। आपराधिक घटनाएं न घटे और डय़ूटी पर तैनात जवान सलामत रहें। ऐसा माना जाता है कि पूर्णमासी के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा करवाने से भौतिक, दैविक और दैहिक तीनों प्रकार के कष्टों का नाश होता है। रल थानाध्यक्ष विनोद कुमार ने इस बावत पूछने पर कहा कि थाने पर पूजापाठ करवाने से आत्मा को संतुष्टि मिलती है। थानाध्यक्ष की मानें तो वे गया व मोकामा में भी प्रत्येक पूर्णमासी को पूजा-पाठ करवाते थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: थाने में सत्यनारायण की कथा