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शीला की जवानी

यार-दोस्तों के बच्चों प्ले-स्कूल जाने लगे तो बीवी चिंता जताने लगी, ‘ मुन्ने को भी स्कूल भेजा जाए, ढाई साल का हो गया।’ प्ले स्कूल पहुंचे, तो पता चला भारी नुकसान हो गया। प्रिंसिपल कहने लगी, ‘आपके बच्चों का आईक्यू ग्रोथ रुक चुका है और अपनी उम्र के बच्चों की तुलना में वह कम से कम नौ महीने पीछे चल रहा है।’

बच्चा उधर स्कूल के मुआयने में व्यस्त था, इधर हमारी घबराहट बढ़ती जा रही थी। हमे नर्वस होता देख प्रिंसिपल सांत्वना देने लगी, ‘अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है। हम एक कैप्सूल कोर्स लांच कर रहे हैं। डिस्काउंट चल रहा है। आपको सिर्फ 15,000 देने होंगे।’ मैं फ्लैशबैक में चला गया- एलआईसी की किश्त, बाथरूम में गीजर, इत्यादि-इत्यादि। पत्नी ने कुहनी मारी तो होश आया।

प्रिंसिपल कैप्सूल कोर्स का एडमिशन फॉर्म सामने रख कर मुस्कुरा रही थी। मैंने जेब टटोलते हुए पेन न होने का ढोंग किया तो उसने कलम आगे बढ़ा दी। मेरी उधेड़बुन बच्चों के डायलॉग से टूटी। स्कूल के चपरासी को देखकर बोल रहा था, ‘भैया जी इस्माइल।’ प्रिंसिपल खुश हुई। कहने लगी, ‘आपके बच्चों के अंदर तो क्रियेटिविटी है। हम कुछ करते हैं।’

प्रिंसिपल ने डिस्काउंट बढ़ा दिया। कहने लगी, ‘टैलेंटेड किड..आई.क्यू़ इम्प्रूवमेंट में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। माइक्रो कैप्सूल ले लीजिए। आपको सिर्फ 8,000 देने होंगे।’ मेरे हाथ में अब हरारत आई। जेब से इस बार कलम भी निकल आई। बीवी से आंखों ही आंखों में बात हुई, ‘क्या हीरा पैदा किया है मेरी जान।’ प्रिंसिपल बच्चों के टैलेंट हंट में बिजी थीं, ‘व्हाट्स योर नेम?’ मुन्ना बोला, ‘शीला की जवानी।’ शर्म से गुलाबी हुई प्रिंसिपल कहने लगी- ‘बच्चे का आईक्यू तो ओके है जी। आपको हंड्रेड पर्सेट डिस्काउंट।’

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