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14 जुलाई, 2020|6:28|IST

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अभिभावकों की कठिन परीक्षा

नर्सरी में अपने बच्चों को दाखिला दिलाने के लिए आजकल अभिभावकों को घंटों लाइन में खड़े होना पड़ रहा है। कई स्कूलों ने तो पहले ही दिन फॉर्म खत्म हो जाने का बोर्ड लगा दिया है। कई स्कूल वाले एडमिशन फॉर्म के बदले मनमानी फीस वसूल रहे हैं। दिल्ली सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोई भी स्कूल एडमिशन फॉर्म की कीमत 25 रुपये से ज्यादा नहीं ले सकता, मगर इन निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसी तरह, हर स्कूल का एडमिशन क्राइटेरिया अलग-अलग है। इससे अभिभावकों में काफी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। सरकार को नर्सरी प्रवेश नीति में पारदर्शी बदलाव करके सभी को शिक्षा का अधिकार देना चाहिए।
श्वेता निगम, एच-19, गढ़वाली मोहल्ला, लक्ष्मी नगर, दिल्ली

पेट्रोल को बख्श दीजिए
यह सही है कि विश्व की आर्थिक स्थिति इन दिनों पेट्रोलियम पदार्थो पर ज्यादा निर्भर कर रही है। ज्यादातर देश पेट्रोलियम पदार्थो की आमदनी पर ही निर्भर हैं। हमारा देश भी पेट्रो पदार्थो पर निर्भर है, परंतु उस तरह से नहीं, जैसे खाड़ी देश हैं। यह खेद की बात है कि हमारे देश में भी पेट्रोलियम पदार्थो पर करों का बोझ लादकर केंद्र और राज्य सरकारें देशवासियों का खुला शोषण कर रही हैं। हमारे देश के सभी राजनीतिक दल इन करों को जायज बता रहे हैं। चाहे वह भाजपा शासित गुजरात, मध्य प्रदेश सरकार हो या वामदलों के शासन वाले केरल, पंश्चिम बंगाल या त्रिपुरा हों। यदि राजस्व के आकड़े सुखद हैं, तो फिर पेट्रोलियम पदार्थो पर जनता को राहत क्यों नहीं मिल रही?
कृष्णमोहन गोयल, 113, बाजार कोट, अमरोहा

नए साल पर कामना
नक्कारखाना कॉलम में हर बुधवार के.पी. सक्सेना जी की मौलाना के साथ बड़ी रोचक वार्ता होती है। 31 दिसंबर को उर्मिल कुमार थपलियाल ने बीत गए वर्ष 2010 को व्यंग्यात्मक शैली में मधुर विदाई दी है। इसके साथ नए साल की शुभकामना भी दी। हमारी भी कामना है कि यह वर्ष भारत की जनता को सन्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करे, और भ्रष्टाचारियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।
देवराज आर्य मित्र, हरि नगर, नई दिल्ली

महिलाओं से भेदभाव
उनतीस दिसंबर के अंक में छपी राजीव गर्ग की रिपोर्ट न्यायसंगत व हृदयस्पर्शी थी, इसमें सभी महिला खिलाड़ियों का दर्द शामिल था। जो महिला हॉकी खिलाड़ी हैं और जिन्होंने अपनी ईमानदारी, निष्ठा और त्याग से देश का नाम कभी ऊंचा किया था, आज उन्हीं का नाम हॉकी जगत से हटाया जा रहा है। यह घोर अन्याय है। इन महिला हॉकी खिलाड़ियों को इस खेल से वंचित न किया जाए, नहीं तो यह हमारे देश का अपमान होगा। अगर इन महिलाओं की तमन्ना है हॉकी में हिस्सा लेने की, तो इन्हें अवसर तो देना ही चाहिए।
श्याम सुन्दर, 1814, संजय बस्ती, तिमारपुर, दिल्ली

नींद में खलल
पूरे दिन की मेहनत के बाद आदमी रात को चैन की नींद लेना चाहता है, लेकिन जब बारातों के गाजे-बाजे, आतिशबाजियों का शोर उसे सुनने को मिले, तो अपना सिर पीटने के सिवा उसके पास और क्या चारा है। दिल्ली में ऐसा अक्सर देखने को मिलता है कि तंग गलियों में भी लोग कानफाड़ संगीत बजाते हैं। उन्हें इतना भी खयाल नहीं रहता कि पड़ोस में कोई बीमार है। इसलिए पुलिस आयुक्त से हमारा विनम्र निवेदन है कि वह कोई ऐसी व्यवस्था कराएं, जिससे कम से कम रात 11 बजे के बाद शोर-शराबा न हो। हमें किसी की खुशी से भला क्या ऐतराज हो सकता है, लेकिन यदि वह दूसरों के लिए परेशानी का सबब बन जाए, तो व्यवस्था को कदम उठाना ही चाहिए।
इंद्र सिंह धिगान, रेडियो कॉलोनी, किंग्जवे कैम्प, दिल्ली

ताकि न्याय हो सके
हमारे देश में एक से बढ़कर एक भ्रष्टाचार की पोल खुलती जा रही है। अक्सर देखा जाता है कि घोटाले के उजागर होने के बाद सरकार जांच आयोग गठित कर देती है और फिर आयोग पर आयोग बनाने का सिलसिला चलता रहता है। एक बार फिर बोफोर्स दलाली कांड चर्चा में है। इसकी जांच के बारे में कहा जाने लगा है कि जितने रुपये की दलाली नहीं दी गई, उससे कहीं अधिक रुपये तो इसकी जांच पर खर्च हो गए। नतीजा सबके सामने है। वह आज भी सिर्फ राजनीति का मुद्दा बना हुआ है। कानून तो न जाने कहां दुबक गया। इसलिए मेरा मानना है कि जितने भी घोटाले उजागर हुए हैं, उनकी जांच की सीमा तय की जाए और उन्हें फास्ट ट्रैक अदालतों के सामने पेश किया जाए। यदि कोई जांच अधिकारी तय सीमा के अंदर जांच पूरी नहीं करता है, तो उसकी पदोन्नति रोक दी जाए। जांच अधिकारियों की सुस्ती और भ्रष्टाचार के कारण भी दोषियों के हौसले बढ़ते हैं। जब तक अपराधियों को त्वरित सजा नहीं मिलेगी, तब तक हमारे समाज से भ्रष्टाचार का भूत नहीं भागेगा।
बीना रानी टांक, हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

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